ओरिएंटल इंश्योरेंस ने लॉन्च की नई पैरामीट्रिक बीमा पॉलिसी ‘सर्वत्र सुरक्षा’
बीमा भुगतान के लिए नए मानक
– बारिश, तापमान और तेज हवाओं के आधार पर मिलेगा बीमा भुगतान
– लंबी क्लेम प्रक्रिया से मिलेगी राहत, व्यवसायों और ग्राहकों को होगा लाभ
नई बीमा पॉलिसी का उद्देश्य
नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने ‘सर्वत्र सुरक्षा’ नामक एक नई पैरामीट्रिक बीमा पॉलिसी पेश की है। यह पॉलिसी रिटेल और कमर्शियल दोनों ग्राहकों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम संबंधी जोखिमों से त्वरित वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाई गई है।
बीमा सुरक्षा की आवश्यकता
कंपनी के सीएमडी संजय जोशी ने बताया कि बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं के बीच ग्राहकों को ऐसी बीमा सुरक्षा की आवश्यकता है, जो पारंपरिक बीमा की तुलना में तेज और प्रभावी हो। उन्होंने कहा कि ‘सर्वत्र सुरक्षा’ पॉलिसी संकट के समय में ग्राहकों को त्वरित वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
क्लेम प्रक्रिया में सुधार
जोशी ने कहा कि पारंपरिक बीमा योजनाओं में नुकसान का आकलन करने और क्लेम निपटान में समय लगता है, जबकि ‘सर्वत्र सुरक्षा’ में भुगतान पूर्व निर्धारित मौसमीय संकेतकों के आधार पर स्वतः सक्रिय हो जाता है। इससे ग्राहकों को राहत राशि प्राप्त करने के लिए लंबी प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना पड़ता।
पैरामीट्रिक बीमा की विशेषताएँ
पैरामीट्रिक बीमा एक आधुनिक और तकनीक आधारित व्यवस्था है, जिसमें वास्तविक नुकसान का सर्वेक्षण करने के बजाय पहले से तय किए गए संकेतकों को आधार बनाया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में वर्षा, तापमान या हवा की गति तय सीमा से बाहर जाती है, तो बीमा भुगतान स्वतः सक्रिय हो जाता है। इससे क्लेम प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनती है।
ग्राहकों के लिए विकल्प
कंपनी ने बताया कि इस पॉलिसी में ग्राहकों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न शर्तें तय करने की सुविधा दी गई है। इसमें स्ट्राइक लेवल, एग्जिट लेवल, नोटशनल पेमेंट और सम इंश्योर्ड जैसे विकल्पों को अनुकूलित किया जा सकता है।
नया मानक स्थापित करने की उम्मीद
ओरिएंटल इंश्योरेंस का कहना है कि ‘सर्वत्र सुरक्षा’ पॉलिसी व्यवसायों को वित्तीय झटकों से उबरने में मदद करेगी और आम ग्राहकों को मौसम आधारित जोखिमों के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान करेगी। कंपनी को उम्मीद है कि यह योजना भारत में जोखिम प्रबंधन और आपदा सुरक्षा के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करेगी।
