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कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव: क्या है इसके पीछे का कारण?

कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिसमें आज मामूली वृद्धि हुई है। हालांकि, पिछले दिन भारी गिरावट आई थी। आंध्र प्रदेश में पेट्रोल की कीमतें सबसे अधिक हैं, जबकि दिल्ली में भी दाम स्थिर हैं। सऊदी अरब से बढ़ती तेल आपूर्ति और ईरान के साथ संभावित बातचीत के कारण बाजार में हलचल है। जानें और क्या कारण हैं जो इन कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
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नई दिल्ली में कच्चे तेल की स्थिति


नई दिल्ली: कच्चे तेल के बाजार में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। आज कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले दिन इसमें लगभग 3.50 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई थी। इसके बावजूद, ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। राहत की बात यह है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने आज पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई वृद्धि नहीं की है। मई महीने के बाद से देश में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं।


पेट्रोल और डीजल की कीमतें

22 सितंबर को, आंध्र प्रदेश के चित्तूर में पेट्रोल की कीमत 118.34 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीजल 106.06 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं, भारत में सबसे सस्ता पेट्रोल 88.66 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीजल की कीमत 84.56 रुपये प्रति लीटर है। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। चित्तूर में पेट्रोल दिल्ली की तुलना में 16.22 रुपये और डीजल 10.86 रुपये महंगा है, जबकि पोर्ट ब्लेयर में पेट्रोल 13.46 रुपये और डीजल 10.64 रुपये प्रति लीटर सस्ता है।


सोमवार को गिरावट का कारण

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण सऊदी अरब से तेल आपूर्ति बढ़ने के संकेत और ईरान के साथ संभावित कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद थी। इस दौरान, ब्रेंट क्रूड की कीमत लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गई, जिसमें 3.4 फीसदी की गिरावट आई। अमेरिकी WTI क्रूड में भी लगभग 4.5 फीसदी की कमी आई।


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बढ़ी गतिविधि

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, तेल बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ा हुआ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि पिछले दो हफ्तों में इस समुद्री मार्ग से कच्चे तेल और एलएनजी की आवाजाही छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। 17 से 19 सितंबर के बीच, रोजाना लगभग 32 जहाज इस मार्ग से गुजरे, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।


सऊदी अरब की तेल सप्लाई में वृद्धि

सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि सऊदी अरब की तेल लोडिंग गतिविधियों में तेजी आई है। फारस की खाड़ी में सऊदी अरब के प्रमुख बंदरगाह पर जून के बाद सबसे अधिक तेल टैंकर देखे गए हैं, जो दर्शाता है कि ड्रोन हमलों के बावजूद सऊदी अरब अपने तेल निर्यात को बढ़ाने में सफल हो रहा है।


ईरान-अमेरिका के बीच संभावित बातचीत

तेल की कीमतों में गिरावट का एक और कारण ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि वे न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए तैयार हो सकते हैं। यदि बातचीत आगे बढ़ती है, तो इससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कम हो सकती है।


सप्लाई पर खतरे अभी भी बने हुए हैं

हालांकि, तेल बाजार में जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सऊदी अरब ने रियाद के लिए हवाई हमलों की चेतावनी जारी की है, और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से भी खतरा बना हुआ है। इसके अलावा, यूक्रेन द्वारा रूसी रिफाइनरियों पर हमलों ने वैश्विक ईंधन बाजार में चिंता बढ़ा दी है।


लीबिया में उत्पादन में कमी

लीबिया के शरारा क्षेत्र में भी उत्पादन में गिरावट आई है। देश की नेशनल ऑयल कॉरपोरेशन के अनुसार, एक सशस्त्र समूह ने वहां की पाइपलाइन बंद कर दी है। यदि यह पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है, तो इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति का दबाव बढ़ सकता है।