कर्नाटक में गुटखा और तंबाकू पर एक साल का प्रतिबंध: किसानों की चिंताएं
कर्नाटक सरकार का नया आदेश
कर्नाटक सरकार ने राज्य में गुटखा और तंबाकू युक्त पान मसाला के उत्पादन, बिक्री, भंडारण और परिवहन पर एक साल के लिए रोक लगाने का निर्णय लिया है। यह आदेश 10 अगस्त 2026 से प्रभावी हुआ है, जिसके चलते सुपारी उत्पादक किसान अपनी फसल और आय को लेकर चिंतित हैं। कैंपको संस्था ने इस बैन के प्रभाव को लेकर चिंता जताई है, यह कहते हुए कि इसका नकारात्मक असर उन किसानों पर नहीं होना चाहिए जो सही तरीके से खेती कर रहे हैं।
तंबाकू पर रोक का उद्देश्य
कर्नाटक के खाद्य विभाग ने 10 अगस्त को यह आदेश जारी किया। इसके अनुसार, राज्य में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला की बिक्री और परिवहन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। यह नियम पूरे राज्य में एक साल तक लागू रहेगा, जिससे दुकानों और बाजारों में इन उत्पादों की बिक्री बंद हो जाएगी।
किसानों की चिंताएं और CAMPCO की प्रतिक्रिया
गुटखा और पान मसाला बनाने में सुपारी का उपयोग होता है, जिससे किसानों को यह डर है कि इससे सुपारी की मांग में कमी आ सकती है। सेंट्रल एरेकेनट एंड कोको मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कोऑपरेटिव लिमिटेड (CAMPCO) किसानों की फसल को उचित मूल्य पर बेचने और उनके अधिकारों की रक्षा करने का कार्य करती है। CAMPCO ने इस बैन पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का निर्णय स्वास्थ्य के लिए सही है, लेकिन इसका नकारात्मक प्रभाव उन किसानों पर नहीं होना चाहिए जो अपनी सुपारी की खेती कानूनी और सही तरीके से कर रहे हैं।
बैन का खेती और व्यापार पर प्रभाव
इस मामले में एक राहत की बात यह है कि सरकार ने केवल तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों पर रोक लगाई है। इस आदेश में सुपारी की सामान्य खेती या उसके कानूनी व्यापार पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। CAMPCO का कहना है कि लोगों को तंबाकू उत्पादों के बैन को सामान्य सुपारी की खेती से नहीं जोड़ना चाहिए। संस्था लगातार सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपील कर रही है कि सही तरीके से खेती और व्यापार करने वाले किसानों को इस निर्णय से कोई नुकसान न हो।
कर्नाटक का सुपारी व्यापार
कर्नाटक में सुपारी का व्यापार बहुत महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, 2026-27 की पहली तिमाही में सुपारी और उससे संबंधित उत्पादों से सरकार को लगभग 90.02 करोड़ रुपये का टैक्स प्राप्त हुआ था। यह दर्शाता है कि सुपारी का व्यापार राज्य की अर्थव्यवस्था में कितना महत्वपूर्ण है।
कर्नाटक का राष्ट्रीय योगदान
ऑल इंडिया अरेका ग्रोअर्स एसोसिएशन (AIAGA) और कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में उत्पादित सुपारी का लगभग 71.56% हिस्सा कर्नाटक में उगाया जाता है, और राज्य का कुल उत्पादन में योगदान लगभग 75.47% है। यह आंकड़े इस बात को स्पष्ट करते हैं कि कर्नाटक का सुपारी उत्पादन देश के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
