कर्नाटक में मूल्य समर्थन योजना के तहत फसलों की खरीद को मिली मंजूरी
केंद्र सरकार की नई खरीद योजना
(फाइल फोटो के साथ) बेंगलुरु, 30 सितंबर: केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने बुधवार को जानकारी दी कि केंद्र ने 2026-27 के खरीफ सत्र के लिए कर्नाटक में मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत 13413 टन सूरजमुखी, 38250 टन मूंग और 1,15,500 टन सोयाबीन की खरीद को स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के माध्यम से सहायता प्राप्त होगी। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त किया।
सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी
कुमारस्वामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘इन मंजूरियों से एमएसपी पर खरीद के माध्यम से किसानों को महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।’’ कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 29 सितंबर को तीन अलग-अलग पत्रों के माध्यम से कर्नाटक में इन फसलों की मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत खरीद को मंजूरी दी। यह मंजूरी कर्नाटक सरकार के अनुरोध पर दी गई थी।
खरीद प्रक्रिया और दिशा-निर्देश
खरीद की अवधि शुरू होने की तारीख से 90 दिन होगी, और इसकी शुरुआत की तारीख राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाएगी। केंद्रीय नोडल एजेंसियों को खरीद की शुरुआत की तारीख के बारे में केंद्र को सूचित करने का निर्देश दिया गया है। एजेंसियों को वैज्ञानिक भंडारण के लिए उपलब्ध स्थान की पुष्टि करने और केवल उतनी मात्रा में खरीद करने का निर्देश दिया गया है, जितनी के लिए भंडारण की पुष्टि हो चुकी हो।
किसानों के लिए भुगतान और अन्य निर्देश
केंद्र ने कहा कि खरीद पंजीकृत किसानों के आधार पर ‘बायोमेट्रिक’ या चेहरे की पहचान के माध्यम से की जानी चाहिए और केवल उचित औसत गुणवत्ता (एफएक्यू) वाली उपज की खरीद की जानी चाहिए। खरीद तब की जाएगी जब बाजार भाव एमएसपी से नीचे हों। राज्य सरकार को मंजूर मात्रा की खरीद लागत का कम से कम 15 प्रतिशत ‘रिवॉल्विंग फंड’ के रूप में उपलब्ध कराने और खरीद के तीन दिन के भीतर किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
पीएसएस परिचालन के लिए निर्देश
राज्य सरकार को पूरे पीएसएस परिचालन को मंडी कर या उपकर से मुक्त करने और केंद्रीय नोडल एजेंसियों द्वारा प्रत्यक्ष खरीद केंद्र स्थापित करने में सहयोग करने का भी निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, केंद्र ने एजेंसियों और राज्य सरकार को पीएसएस के तहत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) लाभार्थियों का आंकड़ा दर्ज करने का भी निर्देश दिया है, ताकि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत निर्धारित धनराशि का उपयोग किया जा सके।
