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किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती का महत्व: ओम बिरला का संदेश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्राकृतिक खेती को किसानों की आय बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण साधन बताया है। उन्होंने एक कार्यशाला में किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों और प्राकृतिक खेती के लाभों के बारे में जानकारी दी। बिरला ने हाड़ौती क्षेत्र की उपजाऊ ज़मीन और जलवायु की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए किसानों को बागवानी, मधुमक्खी पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में विविधता अपनाने का सुझाव दिया। सरकार किसानों की मेहनत को उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रयासरत है।
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किसानों और जवानों का योगदान

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किसानों और जवानों के योगदान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें 'देश की जीवनरेखा' कहा है। सोमवार को 'स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर मैनेजमेंट' (SIAM) में प्राकृतिक खेती पर आयोजित एक क्षेत्रीय कार्यशाला में उन्होंने कृषि को टिकाऊ और लाभकारी बनाने का अपना संकल्प दोहराया। इस कार्यशाला में लगभग 1,000 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया, जहां उन्हें कम लागत में अधिक मुनाफा और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई।


प्राकृतिक खेती का महत्व

बिरला ने कहा, 'प्राकृतिक खेती अपनाने से हम न केवल भूमि की उर्वरता सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और भविष्य को भी सुरक्षित कर रहे हैं।' इस कार्यशाला में किसानों को प्राकृतिक खेती, कम लागत वाली खेती, कृषि उत्पादों का विपणन, पशुपालन और बागवानी के बारे में जानकारी दी गई।


हाड़ौती क्षेत्र की विशेषताएँ

कोटा के सांसद बिरला ने बताया कि हाड़ौती क्षेत्र की उपजाऊ ज़मीन, अनुकूल जलवायु और पानी की प्रचुरता इसे प्राकृतिक खेती के लिए उपयुक्त बनाती है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बागवानी, फलों की खेती, मधुमक्खी पालन और पशुपालन को अपनाने का आग्रह किया।


किसानों की आय बढ़ाने के सुझाव

बागवानी और फलों की खेती: नकदी फसलों और फलों के उत्पादन से त्वरित मुनाफा कमाया जा सकता है।


मधुमक्खी पालन: कम लागत में शहद उत्पादन से अतिरिक्त आय का एक बड़ा स्रोत बन सकता है।


पशुपालन और डेयरी: यह पारंपरिक व्यवसाय संकट के समय वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।


बाजार तक सीधी पहुंच: बिचौलियों पर निर्भरता कम कर सीधे कोऑपरेटिव या डिजिटल मंडियों के माध्यम से उत्पादों को बेचना।


सरकार का समर्थन

लोकसभा अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि किसानों की मेहनत को उचित मूल्य दिलाने और कृषि अवसंरचना को मजबूत करने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है।