कृत्रिम मेधा का मानव संसाधन प्रबंधन में बढ़ता प्रभाव
कृत्रिम मेधा की भूमिका
कृत्रिम मेधा (एआई) अब मानव संसाधन (एचआर) प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण स्थान ग्रहण कर चुका है। एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, 60 प्रतिशत पेशेवरों का मानना है कि एआई एचआर के सभी कार्यों में एक प्रमुख प्राथमिकता बन गया है। इसके अलावा, 15 प्रतिशत ने भर्ती और नए कर्मचारियों को कार्य में शामिल करने में इसके बढ़ते महत्व की पुष्टि की है।
यह जानकारी ‘एआई ऐज द न्यू एचआर प्रायोरिटी—एफिशिएंसी, कॉस्ट एंड वर्कफोर्स इम्पैक्ट’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में दी गई है, जो 1,811 एचआर पेशेवरों पर किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है, जो 7 से 31 मई के बीच संपन्न हुआ।
रिपोर्ट के निष्कर्ष
रिपोर्ट के अनुसार, 60 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने एआई को अपनाने का मुख्य कारण दक्षता और उत्पादकता में सुधार बताया। वहीं, 20 प्रतिशत का मानना है कि कंपनियां लागत में कमी लाने और कार्यबल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए एआई का उपयोग कर रही हैं।
एआई पहले से ही एचआर के दैनिक कार्यों में बदलाव ला रहा है। 42 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि इससे एचआर प्रक्रियाओं की गति और दक्षता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, जबकि 29 प्रतिशत ने मध्यम स्तर के लाभ की बात की। इससे भर्ती, नए कर्मचारियों को कार्य में शामिल करने की प्रक्रिया और कर्मचारी सेवाएं अधिक तेज और सरल हो गई हैं।
कार्यबल संरचना पर प्रभाव
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि एआई दक्षता के अलावा कार्यबल संरचना को भी प्रभावित कर रहा है। 42 प्रतिशत पेशेवरों का मानना है कि इससे दोहराव वाले कार्यों पर निर्भरता कम हो रही है, जबकि 37 प्रतिशत ने कहा कि यह अधिक बुद्धिमान कार्यबल नियोजन को संभव बना रहा है।
