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कृषि क्षेत्र में एनपीए में कमी और उत्पादकता में सुधार की आवश्यकता

नाबार्ड के चेयरमैन शाजी कृष्णन वी ने कृषि क्षेत्र में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में कमी और फसल उत्पादकता में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि एनपीए अब 10 प्रतिशत से नीचे आ गया है और इसके और घटने की संभावना है। इसके साथ ही, उन्होंने किसानों की ऋण चुकाने की क्षमता बढ़ाने के लिए बीमा और ऋण सहायता की आवश्यकता की बात की। जानें इस विषय पर और क्या कहा उन्होंने।
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कृषि क्षेत्र में एनपीए में कमी

नाबार्ड के अध्यक्ष शाजी कृष्णन वी ने बृहस्पतिवार को बताया कि कृषि क्षेत्र में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की दर काफी कम हो गई है। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादकता में वृद्धि और ऋण सुविधाओं में सुधार से इसे और घटाया जा सकता है। वैश्विक वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) सम्मेलन में उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र में एनपीए एक समय दोहरे अंकों में था, लेकिन अब यह एकल अंक में, यानी 10 प्रतिशत से नीचे आ चुका है। उन्होंने कहा, 'उत्पादकता में सुधार से यह और भी बेहतर हो सकता है, और यह आवश्यक है।


इससे किसानों की ऋण चुकाने की क्षमता में वृद्धि होगी। इसके बाद हमें बीमा और ऋण सहायता की आवश्यकता होगी... हम इन्हीं क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।' कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर लगभग 3.5 प्रतिशत रहने की जानकारी देते हुए नाबार्ड के अध्यक्ष ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इसमें तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'जब भारत को तेजी से आगे बढ़ना है और सरकार का लक्ष्य विकसित भारत है, तो समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ना होगा।


अन्यथा, किसी न किसी प्रकार का अंतर उत्पन्न होगा।' एग्री स्टैक के बारे में उन्होंने बताया कि इसे तीन स्तरों वाले बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड ने एक ऐसा ऋण वितरण तंत्र लागू किया है, जो एग्री स्टैक और इंडिया स्टैक को एकीकृत करता है। इससे लगभग 7.5 करोड़ किसानों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है।