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कृषि मंत्री ने खरीफ फसल उत्पादन पर जताई सकारात्मकता, अल नीनो की चुनौतियों का सामना

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2026-27 के खरीफ फसल सत्र में खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट की संभावना को नकारा है। उन्होंने अल नीनो और सूखे की चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार की तैयारियों की जानकारी दी। चौहान ने बताया कि रबी फसलों के लिए उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किया गया है और विभिन्न राज्यों में फसलों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता और कृषि भूमि के उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया।
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खरीफ फसल उत्पादन पर आशावाद

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को बताया कि अल नीनो और देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ और सूखे की चिंताओं के बावजूद 2026-27 के खरीफ फसल सत्र में खाद्यान्न उत्पादन में कोई महत्वपूर्ण गिरावट की संभावना नहीं है। उन्होंने रबी सत्र की तैयारियों पर आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने अप्रैल से ही व्यापक तैयारियों की शुरुआत कर दी थी और अल नीनो की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्यों के साथ रबी फसलों की योजना पर चर्चा की जा रही है। चौहान ने बताया कि 2026-27 के लिए रबी खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 177.72 करोड़ टन निर्धारित किया गया है, जबकि पिछले वर्ष का वास्तविक उत्पादन 174.51 करोड़ टन था।


फसलों की स्थिति और बारिश का प्रभाव

रबी सत्र की मुख्य फसल गेहूं है। चौहान ने कहा कि कुछ खरीफ फसलों का रकबा कम हुआ है, लेकिन कुल बुवाई का रकबा पिछले वर्ष के समान है। वर्तमान में बारिश में लगभग 12 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि 20 प्रतिशत से अधिक की कमी होने पर सूखे की स्थिति मानी जाती है। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि इस स्तर की कमी से खाद्यान्न उत्पादन पर कोई बड़ा असर पड़ेगा।" खरीफ उत्पादन का अंतिम अनुमान जल्द ही जारी किया जाएगा।


खरीफ फसलों का उत्पादन लक्ष्य

सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए खरीफ खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 196.21 करोड़ टन रखा है, जबकि पिछले वर्ष का वास्तविक उत्पादन 174.14 करोड़ टन था। खरीफ फसलों में धान का रकबा सबसे अधिक करीब 16.32 लाख हेक्टेयर कम हुआ है। मक्का, सोयाबीन और कपास का रकबा भी घटा है, जबकि उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर का रकबा बढ़ा है। चौहान ने कहा कि यह दलहन और मोटे अनाज की ओर लोगों के बढ़ते झुकाव को दर्शाता है।


राज्यों में फसल प्रभावित

महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में खेती का रकबा कम होने की सूचना मिली है। इन राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण लगभग 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं। नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। अल नीनो के 2026 के अंत तक मजबूत होने की वैश्विक अनुमानों के संदर्भ में चौहान ने कहा कि सरकार मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार बोई जाने वाली फसलों और किस्मों पर राज्यों के साथ चर्चा कर रही है।


फसल योजना में बदलाव

बारिश, पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी में क्षेत्रीय भिन्नताओं के आधार पर फसल योजना में बदलाव किया जा रहा है, और सूखे की स्थिति वाले क्षेत्रों में आकस्मिक उपाय किए जाएंगे। चौहान ने कहा कि बारिश में 12 प्रतिशत कमी होने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा संकट नहीं है और समस्याएं कुछ विशेष क्षेत्रों तक सीमित हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और राजस्थान के कुछ हिस्सों में चिंता जताई गई है।


राज्यों से रिपोर्ट का इंतजार

राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। चौहान ने कहा कि कर्नाटक के अनुरोध पर तीन अक्टूबर को केंद्रीय दल वहां जाएगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी केंद्रीय आकलन दल भेजने का अनुरोध किया है।


कृषि भूमि का उपयोग

चौहान ने कहा कि तत्काल लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कृषि भूमि खाली न रहे। केंद्र राज्यों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली, स्थानीय मिट्टी और मौसम के अनुकूल बीज और फसल किस्मों की पहचान में मदद करेगा। उर्वरकों के बारे में उन्होंने कहा कि कुछ उर्वरकों की कीमतों में लगभग दोगुने तक उतार-चढ़ाव आया है, फिर भी इनकी पर्याप्त उपलब्धता है।


उर्वरक की मांग

राज्यों की मांग के अनुसार 2026-27 के लिए कुल 380 लाख टन उर्वरक की आवश्यकता आंकी गई है। मौजूदा शुरुआती भंडार 163 लाख टन से अधिक है, जो पिछले साल के रबी सत्र की शुरुआत में उपलब्ध 122 लाख टन से काफी अधिक है। चौहान ने कहा कि वायु प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।


पराली जलाने का मुद्दा

उन्होंने कहा कि पराली जलाने का प्रदूषण में कुछ योगदान होता है, लेकिन इसे प्रदूषण का मुख्य कारण बताना और इसके आधार पर किसानों को परेशान करना गलत है। इस अवसर पर कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, रामनाथ ठाकुर, कृषि सचिव अतीश चंद्र और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एम. एल. जाट भी उपस्थित थे।