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केंद्र सरकार ने चीनी स्टॉक पर नई सीमाएं लागू कीं, कीमतों में वृद्धि का सामना

केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की नई सीमाएं निर्धारित की हैं। खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। नए आदेश के तहत, उपभोक्ताओं को 15 दिनों की खपत से अधिक स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, चीनी कंपनियों के शेयरों में तेजी आई है, जबकि खुदरा चीनी की कीमतें भी बढ़ी हैं। जानें इस आदेश का विस्तृत विवरण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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चीनी की कीमतों में वृद्धि के खिलाफ सख्त कदम

चीनी की कीमतों में हालिया वृद्धि के मद्देनजर, केंद्र सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की नई सीमाएं निर्धारित की हैं। इस दिशा में, सभी चीनी मिलों को आदेश दिया गया है कि वे 17 से 19 अगस्त, 2026 के बीच बेची गई चीनी की जानकारी मिल-वार और खरीदार-वार प्रदान करें। खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल मीडिया पर बताया कि जो उपभोक्ता महीने में 10 टन से अधिक चीनी का उपयोग करते हैं, उन्हें 15 दिनों की खपत से अधिक स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। खाद्य मंत्रालय ने 'चीनी (बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा) आदेश, 2026' जारी किया है, जिसमें कन्फेक्शनर, सॉफ्ट ड्रिंक निर्माता, खाद्य प्रोसेसिंग इकाइयां, मिठाई विक्रेता और अन्य संस्थागत खरीदार शामिल हैं। यह आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।


चीनी मिलों से बिक्री का ब्योरा मांगा गया

चीनी कंपनियों के शेयरों में तेजी आई है, जिसका कारण केंद्र सरकार द्वारा स्टॉक रखने की सीमाओं को सख्त करना और घरेलू तथा वैश्विक बाजारों में चीनी की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि है। यह आदेश पहले के आदेश के बाद आया है, जो 1 अगस्त से 30 नवंबर तक लागू था, जिसमें चीनी डीलरों के लिए स्टॉक की सीमा 30 दिनों के लिए 4,000 क्विंटल निर्धारित की गई थी। ये पाबंदियां चीनी की कीमतों में भारी वृद्धि के बीच लागू की गई हैं। 2026-27 सीज़न से पहले शुरुआती स्टॉक की कमी के कारण मिल से निकलने वाली चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। एक उद्योग संगठन के अनुसार, मंगलवार को देशभर में चीनी की औसत एक्स-मिल कीमत 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, जो पिछले वर्ष 3,900 रुपये थी। NCDEX के आंकड़ों के अनुसार, 19 अगस्त, 2026 को भारत के प्रमुख बाजारों में चीनी की स्पॉट कीमतें 16 साल के उच्चतम स्तर 5,530 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गईं।


नए आदेश में क्या निर्देश दिए गए हैं

उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त को खुदरा चीनी की कीमतें सालाना आधार पर लगभग 13 प्रतिशत बढ़कर 52.30 रुपये प्रति किलो हो गईं, जो पिछले वर्ष 46.34 रुपये थीं। आमतौर पर अगस्त से नवंबर के बीच चीनी की मांग बढ़ जाती है, क्योंकि इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। नए आदेश के तहत, हर मिल से थोक खरीदार को बेची जाने वाली चीनी की मासिक मात्रा की जांच की जाएगी। चीनी के लिए लागू HSN कोड का उपयोग करते हुए, विक्रेताओं और/या खरीदारों द्वारा फाइल किए गए GST रिटर्न के आधार पर खपत का निर्धारण किया जाएगा। थोक खरीदार का अर्थ है - कन्फेक्शनर, सॉफ्ट ड्रिंक निर्माता, खाद्य प्रोसेसिंग इकाइयां, मिठाई विक्रेता या अन्य संस्थागत खरीदार, जिसकी पिछले एक वर्ष में औसत मासिक खपत 10 टन से कम न हो। यह आदेश केंद्र या राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन या स्थानीय निकायों से संबंधित संस्थाओं पर लागू नहीं होता है। स्टॉक रखने के कड़े नियम 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 सीज़न के लिए चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच लाए गए हैं।


इथेनॉल खरीद पर नई पाबंदियां

उद्योग का अनुमान है कि नए सीज़न के लिए शुरुआती स्टॉक 4-4.2 मिलियन टन होगा, जबकि कुछ शोधकर्ताओं का अनुमान इससे कम, यानी 3.2-3.5 मिलियन टन है - ये दोनों ही अनुमानित घरेलू आवश्यकता (लगभग 5-6 मिलियन टन) से कम हैं। इसी संदर्भ में, भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने एक कड़ा निर्देश जारी किया है। इसके तहत सभी इथेनॉल सप्लायर्स के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे खुद के रजिस्टर्ड डिस्टिलरी यूनिट चलाने वाले घरेलू निर्माता हों। IOCL, BPCL, HPCL, MRPL और NRL जैसी प्रमुख सरकारी ईंधन रिटेल कंपनियों के समूह द्वारा जारी इस नोटिस में तीसरे पक्ष के स्रोतों से इथेनॉल खरीदने पर स्पष्ट रूप से रोक लगा दी गई है।