केंद्र सरकार ने मेटा से बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों पर स्पष्टीकरण मांगा
केंद्र सरकार ने मेटा से इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े आपत्तिजनक विज्ञापनों पर स्पष्टीकरण मांगा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कंपनी के प्रतिनिधियों को बुलाने का निर्देश दिया है। मंत्रालय यह जानना चाहता है कि ऐसे विज्ञापन कैसे प्रदर्शित हुए और कंपनी की निगरानी प्रणाली में क्या कमी रही। इस मामले में सख्त कानूनों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की जिम्मेदारी तय की गई है। जानें इस मामले में सरकार की अन्य कार्रवाइयों और मेटा के संभावित जवाब के बारे में।
| Jul 3, 2026, 23:29 IST
मेटा से जवाब तलब करने की प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने एक बार फिर मेटा, जो कि इंस्टाग्राम का मालिक है, से जवाब मांगने की प्रक्रिया शुरू की है। इस बार मामला इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित आपत्तिजनक विज्ञापनों का है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे कंपनी के प्रतिनिधियों को बुलाएं।
आपत्तिजनक विज्ञापनों की जांच
मंत्रालय यह जानने की कोशिश कर रहा है कि इंस्टाग्राम जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर ऐसे संवेदनशील विज्ञापन कैसे प्रदर्शित हुए। इसके साथ ही, कंपनी से यह भी पूछा जाएगा कि उनकी निगरानी प्रणाली में क्या कमी रही, जिससे यह सामग्री उपयोगकर्ताओं तक पहुंची।
कानूनी जिम्मेदारियां
बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री के खिलाफ भारत समेत कई देशों में सख्त कानून हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसी सामग्री को समय पर पहचानें और हटाएं। इसी कारण सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।
मेटा से स्पष्टीकरण की मांग
सूत्रों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय मेटा से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगेगा। अधिकारियों का कहना है कि कंपनी को यह बताना होगा कि उसके प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन की जांच प्रणाली कैसे कार्य करती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
सरकार की दूसरी कार्रवाई
यह इस सप्ताह केंद्र सरकार की मेटा के खिलाफ दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले, सरकार ने व्हाट्सऐप की प्रस्तावित यूजर्स नाम सुविधा पर भी कंपनी को नोटिस जारी किया था। सरकार का मानना है कि यदि यह सुविधा बिना सुरक्षा उपायों के लागू होती है, तो इससे साइबर अपराधों में वृद्धि हो सकती है।
व्हाट्सऐप की नई सुविधा पर रोक
केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप को निर्देश दिया है कि वह इस नई सुविधा को लागू न करे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी आवश्यक चर्चाएं पूरी नहीं हो जातीं और वे संतुष्ट नहीं हो जाते, तब तक यह सुविधा शुरू नहीं की जानी चाहिए।
कानूनी अनुपालन की आवश्यकता
सरकार ने मेटा से यह भी पूछा है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। मंत्रालय का कहना है कि बड़े सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को कानून के तहत सभी जिम्मेदारियों का पालन करना अनिवार्य है।
डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी
व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम दोनों ही मेटा के स्वामित्व में हैं और भारत में इनके करोड़ों उपयोगकर्ता हैं। किसी भी सुरक्षा चूक का प्रभाव बड़ी संख्या में लोगों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि सरकार डिजिटल प्लेटफार्मों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित निगरानी प्रणाली और मानवीय समीक्षा को मजबूत बनाना अब सोशल मीडिया कंपनियों की बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। बच्चों की सुरक्षा और साइबर अपराधों की रोकथाम में किसी भी लापरवाही के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
मेटा का आधिकारिक जवाब
अब सभी की नजर मेटा के आधिकारिक जवाब पर होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी सरकार के सवालों का क्या उत्तर देती है और भविष्य में अपने प्लेटफार्मों पर आपत्तिजनक सामग्री को रोकने के लिए कौन से नए सुरक्षा उपाय लागू करती है।
