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केंद्रीय बजट में शेयर बाजार पर कर में संभावित बदलाव पर वित्त मंत्री का बयान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगामी केंद्रीय बजट में शेयर बाजार से होने वाली आय पर कर में संभावित बदलाव के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के सुझावों को सुनने के लिए तैयार है। इस बीच, भारतीय स्टेट बैंक ने दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर को समाप्त करने का सुझाव दिया है। जानें इस पर और क्या कहा गया है और रुपये की गिरती कीमत पर वित्त मंत्री का क्या बयान है।
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शेयर बाजार पर कर में बदलाव की संभावना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगामी केंद्रीय बजट में शेयर बाजार से होने वाली आय पर कर में संभावित बदलाव के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी देने से इनकार किया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि बजट की तैयारी चल रही है और इस समय यह बताना उचित नहीं होगा कि सरकार किन प्रस्तावों पर विचार कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि देश और विदेश के निवेशक पूंजीगत लाभ कर और विभिन्न निवेश पर लगने वाले कर के बारे में अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं, और सरकार उनके सुझावों को सुनने के लिए तैयार है.


विदेशी निवेशकों की निकासी

सीतारमण ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में यह बात कही। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार धन निकाल रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक के शोध विभाग ने हाल ही में सुझाव दिया था कि दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर को समाप्त करने पर विचार किया जाना चाहिए ताकि शेयरों में लंबे समय तक निवेश को बढ़ावा मिल सके.


शेयरों की न्यूनतम अवधि में बदलाव

एसबीआई के शोध विभाग का मानना है कि शेयरों को रखने की न्यूनतम अवधि को 2 से 3 साल तक बढ़ाया जा सकता है, जिससे दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर को हटाने में मदद मिलेगी। रिपोर्ट के अनुसार, इससे अल्पकालिक मुनाफे के लिए आने वाले निवेश पर नियंत्रण रखने और विदेशी निवेश के प्रवाह को स्थिर करने में सहायता मिल सकती है. अक्टूबर में रिपोर्ट जारी होने तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 44,166 करोड़ रुपये निकाले थे, जिससे उनकी कुल निकासी 3.04 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी.


रुपये की गिरती कीमत पर वित्त मंत्री का बयान

वित्त मंत्री ने रुपये की गिरती कीमत पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का लक्ष्य रुपये को किसी विशेष स्तर पर बनाए रखना नहीं है, बल्कि उसकी कीमत में अचानक उतार-चढ़ाव को रोकना है। सीतारमण ने स्वीकार किया कि पिछले 18 महीनों में रुपये पर काफी दबाव रहा है, लेकिन उन्होंने भारत की आर्थिक स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बताया.


निवेश के नए अवसर

सीतारमण ने निवेश के अन्य क्षेत्रों को भी महत्वपूर्ण बताया, जैसे बुनियादी ढांचा, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, दवाएं और नई तकनीकें। उनके अनुसार, देश की राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा योजना का आकार 4.5 लाख करोड़ डॉलर से अधिक हो चुका है। उन्होंने नागरिक विमानन क्षेत्र में बढ़ते निवेश के अवसरों का भी उल्लेख किया, जो करीब 16 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है.