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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विमान ईंधन की कीमत स्थिर रखने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का कोष मंजूर किया

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विमान ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कोष को मंजूरी दी है। यह कदम पश्चिम एशिया संकट के चलते बढ़ती कीमतों से एयरलाइनों को राहत देने के लिए उठाया गया है। इस योजना के तहत सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को ब्याज-मुक्त ऋण दिया जाएगा, जिससे वे एयरलाइनों को स्थिर कीमत पर एटीएफ की आपूर्ति कर सकेंगी। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विमान ईंधन की कीमत स्थिर रखने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का कोष मंजूर किया

विमान ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने की पहल

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों को स्थिर बनाए रखने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कोष को मंजूरी दी है। यह कदम पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के चलते ईंधन की बढ़ती कीमतों से एयरलाइनों को राहत प्रदान करने और हवाई यात्रा को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।


सरकारी बयान के अनुसार, इस योजना के तहत सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (ओएमसी) को 10,000 करोड़ रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण दिया जाएगा, जिससे वे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भारतीय एयरलाइनों को स्थिर कीमत पर एटीएफ की आपूर्ति कर सकेंगी.


अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतों में वृद्धि

यह सहायता उस समय की गई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमत मई में लगभग 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 60.50 रुपये प्रति लीटर थी। इससे विमानन कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है, क्योंकि ईंधन खर्च उनकी संचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत है, और कुछ मामलों में यह 60 प्रतिशत तक भी पहुंच सकता है.


इस व्यवस्था के तहत, पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को तब क्षतिपूर्ति दी जाएगी जब अंतरराष्ट्रीय आयात समता मूल्य स्वीकृत प्रणाली के तहत निर्धारित मानक स्तर से अधिक हो जाएगा.


वैश्विक ईंधन कीमतों में नरमी पर सहायता वापस ली जाएगी

यदि वैश्विक ईंधन कीमतों में कमी आती है, तो तेल कंपनियों को दी गई सहायता वापस ले ली जाएगी और एक निर्धारित समायोजन प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त राशि को भारत की संचित निधि में वापस कर दिया जाएगा.


सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि यह बजटीय सहायता पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और पाकिस्तान द्वारा भारतीय एयरलाइंस के लिए हवाई क्षेत्र बंद करने के कारण विमान ईंधन की कीमतों में वृद्धि के बीच एयरलाइन कंपनियों को राहत देगी.


एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण सहायता का महत्व

मंत्री ने कहा कि यह कोष भारतीय एयरलाइन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमतों को स्थिर करने और संचालन में बाधा को रोकने में सहायक होगा. उन्होंने यह भी बताया कि जब तक संकट बना रहेगा, एयरलाइंस को एटीएफ स्थिर कीमत पर मिलेगा और संकट समाप्त होने के बाद, इसमें शामिल एयरलाइंस को यह राशि वापस करनी होगी.


यह कोष हवाई यात्रियों को किराए में होने वाली वृद्धि से बचाने के साथ-साथ विमानन क्षेत्र से जुड़े 77 लाख रोजगार को भी बनाए रखेगा.


पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव

पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की कीमतों में अस्थिरता के इस दौर में एयरलाइंस के लिए एटीएफ की स्थिर कीमत सुनिश्चित करने के लिए तेल कंपनियों को यह सहायता प्रदान की जाएगी. जब भी आयात समता मूल्य स्वीकृत व्यवस्था के तहत निर्धारित मानक मूल्य से अधिक होगा, यह कोष पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को बढ़े हुए अंतरराष्ट्रीय एटीएफ मूल्यों से होने वाले नुकसान की भरपाई करेगा.


इस व्यवस्था का कार्यान्वयन 36 महीनों के लिए होगा, जिसमें वार्षिक समीक्षा या दी गई राशि की पूरी वसूली/निपटान होने तक का प्रावधान है.


भारतीय एयरलाइंस की चुनौतियाँ

पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण भारतीय एयरलाइंस अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबे मार्गों का उपयोग कर रही हैं, जिससे पिछले वर्ष की शुरुआत से ईंधन की खपत में वृद्धि हुई है. घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमत की सीमा तय की गई है, लेकिन भारतीय एयरलाइंस अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए आयात समता मूल्य पर ईंधन खरीदना जारी रख रही हैं, जिससे उन्हें ऊंची लागत का सामना करना पड़ रहा है.


हालांकि, एटीएफ की कीमतों पर सीमा लगाना एक अस्थायी उपाय है और यह दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है.