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केरल में अदाणी समूह की हिस्सेदारी हस्तांतरण पर मुख्यमंत्री का स्पष्टीकरण

केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने अदाणी समूह द्वारा विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह में हिस्सेदारी हस्तांतरण के मुद्दे पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है और इस प्रक्रिया की जांच एक समिति कर रही है। यह बयान उस समय आया है जब अदाणी समूह ने स्विट्जरलैंड की कंपनी को अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई है, जिससे राज्य में राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। मुख्यमंत्री ने बंदरगाह के विकास की जानकारी भी साझा की, जिसमें विस्तार कार्यों की प्रगति का उल्लेख किया गया है।
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मुख्यमंत्री का बयान

केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने स्पष्ट किया है कि अदाणी समूह ने विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह का संचालन करने वाली कंपनी एवीपीपीएल में अपनी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी को राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना स्थानांतरित करने का प्रयास नहीं किया। विधानसभा में एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि एवीपीपीएल ने अपनी हिस्सेदारी के प्रस्तावित हस्तांतरण के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी थी।


उन्होंने कहा कि रियायत समझौते के अनुसार, बंदरगाह की संचालक कंपनी के स्वामित्व में किसी भी परिवर्तन के लिए राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी आवश्यक है।


हस्तांतरण की प्रक्रिया

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस प्रस्तावित हिस्सेदारी हस्तांतरण की जांच मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति कर रही है। समिति की सिफारिशों और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


राजनीतिक विवाद

यह बयान तब आया है जब एवीपीपीएल में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी को स्विट्जरलैंड की कंपनी मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी (एमएससी) को बेचने की योजना बनाई जा रही है। अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकॉनमिक जोन (एपीएसईजेड) ने इस सौदे की घोषणा जून में की थी, जिसका मूल्य लगभग 1.4 अरब डॉलर बताया गया।


इस प्रस्तावित बिक्री को लेकर केरल में राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया था। सतीशन ने पहले कहा था कि राज्य सरकार को इस सौदे की जानकारी मीडिया से मिली थी और एपीएसईजेड ने कोई औपचारिक सूचना नहीं दी।


बंदरगाह का विकास

विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह का निर्माण 5 दिसंबर, 2015 को ओमन चांडी सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ था। इसका पहला चरण 3 दिसंबर, 2024 को वाणिज्यिक परिचालन के लिए तैयार होगा। सतीशन ने कहा कि समझौते के तहत बंदरगाह के दूसरे, तीसरे और चौथे चरण का विस्तार 31 दिसंबर, 2028 तक पूरा किया जाना है।


विस्तार कार्यों के लिए पर्यावरण मंजूरी 10 मार्च, 2025 को मिली और निर्माण उसी वर्ष सितंबर में शुरू हुआ। अगस्त 2026 तक इन कार्यों में 12.4 प्रतिशत भौतिक प्रगति दर्ज की गई थी।