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कैग ने जीएसटी देनदारी के आकलन के लिए बेहतर तालमेल की सिफारिश की

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने राजस्व विभाग को जीएसटी देनदारी के सही आकलन के लिए आयकर और जीएसटी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की सलाह दी है। रिपोर्ट में 735 करदाताओं के नमूनों की जांच के दौरान कई अनुपालन संबंधी कमियों का पता चला है, जिनका कुल राजस्व पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। कैग ने सुझाव दिया है कि विभाग को रियायतों के दावों की जांच के लिए उचित सत्यापन व्यवस्था लागू करनी चाहिए। इस रिपोर्ट में कार्य अनुबंध और निर्माण सेवाओं से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी प्रकाश डाला गया है।
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कैग की नई रिपोर्ट में जीएसटी देनदारी पर सुझाव

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने राजस्व विभाग को कार्य अनुबंध और निर्माण सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों की जीएसटी देनदारी का सटीक आकलन करने के लिए आयकर और जीएसटी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की सलाह दी है। कैग ने मार्च 2024 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए अपनी अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट में कहा कि करदाताओं की आयकर कार्यवाही से प्राप्त सूचनाओं का उपयोग अघोषित आपूर्ति पर संबंधित जीएसटी देनदारी का पता लगाने के लिए किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राजस्व विभाग को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए।


इसके अलावा, आयकर अधिकारियों के पास उपलब्ध अघोषित आय संबंधी सूचनाओं का उपयोग निर्माण और कार्य अनुबंध सेवाएं देने वाले करदाताओं की जीएसटी देनदारी निर्धारित करने के लिए किया जाना चाहिए। कैग ने 735 करदाताओं के नमूनों की जांच में 123 मामलों में अनुपालन संबंधी कमियां पाई हैं, जिनका कुल राजस्व पर 190.98 करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ा। इन कमियों में सड़क, पुल, रेलवे और मिट्टी कार्य से संबंधित अनुबंधों पर गलत तरीके से रियायती कर दर या छूट का लाभ लेना शामिल है।


कैग ने राजस्व विभाग से यह भी कहा कि वह जांच या आंतरिक ऑडिट के दायरे में अधिक मामलों को शामिल करने की व्यवस्था बनाए। विशेष रूप से उन मामलों की समीक्षा की जानी चाहिए, जहां सड़क, पुल और रेलवे परियोजनाओं में उप-ठेकेदार या उप-उप-ठेकेदार कार्य अनुबंध सेवाओं पर रियायत का लाभ ले रहे हैं, ताकि करदाताओं द्वारा सही कर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि विभाग को रियायतों के दावों को नियंत्रित करने के लिए उचित सत्यापन व्यवस्था लागू करने की संभावना पर विचार करना चाहिए।


कैग ने यह भी सुझाव दिया कि राजस्व विभाग ऐसी व्यवस्था बनाए, जिसके तहत उन मामलों की जांच या आंतरिक ऑडिट किया जाए, जहां कार्य अनुबंध या निर्माण सेवाएं देने वाले करदाता सरकारों से सेवाएं प्राप्त करते हैं या अपंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं से वस्तुएं और सेवाएं लेते हैं। इससे ‘रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म’ के तहत सही जीएसटी भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा। जीएसटी कानून के अनुसार, कार्य अनुबंध का अर्थ किसी अचल संपत्ति से जुड़े कार्य से है।


पुराने वैट और सेवा कर नियमों के विपरीत, जीएसटी व्यवस्था में चल संपत्ति से जुड़े कार्यों को कार्य अनुबंध में शामिल नहीं किया जाता। किसी सेवा को जीएसटी के तहत कार्य अनुबंध मानने के लिए संपत्ति का हस्तांतरण एक महत्वपूर्ण शर्त है।