कोटक महिंद्रा बैंक को डॉयशे बैंक के अधिग्रहण की मिली मंजूरी
कोटक महिंद्रा बैंक का नया अधिग्रहण
नई दिल्ली, चार नवंबर: कोटक महिंद्रा बैंक को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) से डॉयशे बैंक के खुदरा बैंकिंग, निजी बैंकिंग और संपत्ति प्रबंधन कारोबार का अधिग्रहण करने की अनुमति प्राप्त हुई है। इस सौदे के तहत जर्मनी के बैंक का ग्राहकों से सीधा जुड़ाव रखने वाला कारोबार कोटक महिंद्रा बैंक को सौंपा जाएगा। सीसीआई ने मंगलवार को यह जानकारी दी कि उसने भारत में डॉयशे बैंक की शाखाओं के माध्यम से संचालित कारोबार के अधिग्रहण को स्वीकृति दी है।
सीसीआई ने कहा, 'प्रस्तावित संयोजन के अंतर्गत डॉयशे बैंक एजी (विक्रेता) की भारत में स्थित शाखाओं के माध्यम से संचालित खुदरा बैंकिंग, निजी बैंकिंग और संपत्ति प्रबंधन कारोबार का अधिग्रहण किया जाएगा।' आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सौदा कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड (अधिग्रहणकर्ता) द्वारा विक्रेता से एकमुश्त बिक्री के आधार पर किया जाएगा। इस सौदे में दोनों बैंकों की सहायक कंपनियों के बीच 'रेफरल' संबंधी व्यवस्था भी शामिल है, जिसके तहत डॉयशे इन्वेस्टमेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निवेश सलाहकार और पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा के ग्राहकों को कोटक महिंद्रा बैंक की संबंधित पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों के पास भेजा जाएगा।
डॉयशे इन्वेस्टमेंट्स इंडिया, डॉयशे बैंक की अप्रत्यक्ष पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। कोटक महिंद्रा बैंक और डॉयशे बैंक एजी ने अपनी भारतीय शाखा के माध्यम से जून में इस समझौते की घोषणा की थी, जिसमें कोटक ने डॉयशे बैंक के खुदरा बैंकिंग, समृद्ध ग्राहकों से जुड़ी निजी बैंकिंग और संपत्ति प्रबंधन कारोबार का अधिग्रहण करने का निर्णय लिया।
दोनों बैंकों ने बताया कि इस कारोबार में लगभग 29,000 करोड़ रुपये (लगभग 2.7 अरब यूरो) के ऋण, 16,000 करोड़ रुपये (करीब 1.5 अरब यूरो) की जमा और 10,500 करोड़ रुपये (लगभग एक अरब यूरो) की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां शामिल हैं। कोटक महिंद्रा समूह की स्थापना 1985 में हुई थी और यह भारत के प्रमुख विविधीकृत और एकीकृत वित्तीय सेवा समूहों में से एक है। वहीं, डॉयशे बैंक जर्मनी का प्रमुख बैंक है, जिसकी यूरोप में मजबूत उपस्थिति है और अमेरिका तथा एशिया प्रशांत क्षेत्र में भी इसका व्यापक कारोबार है।
नियामक की मंजूरी उन सौदों के लिए आवश्यक होती है जिनका मूल्य एक निश्चित सीमा से अधिक होता है। यह नियामक अनुचित कारोबारी गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने का कार्य करता है।
