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घरेलू शेयर बाजार में गिरावट, विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर

सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थी। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी में महत्वपूर्ण कमी आई। कंपनियों के प्रदर्शन में भी गिरावट देखी गई, जबकि कुछ कंपनियों ने लाभ कमाया। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और बाजार की वर्तमान स्थिति के बारे में।
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शेयर बाजार में गिरावट का कारण

सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की गई बिकवाली थी। बीएसई सेंसेक्स लगभग 548 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी में 157 अंक की कमी आई। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में बॉण्ड प्रतिफल में वृद्धि ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।


सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन

बीएसई सेंसेक्स 547.65 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,924.68 अंक पर समाप्त हुआ। कारोबार के दौरान, यह 796.23 अंक यानी एक प्रतिशत तक गिर गया था। इसी तरह, एनएसई निफ्टी भी 157.10 अंक यानी 0.70 प्रतिशत की कमी के साथ 22,363.35 अंक पर बंद हुआ।


कंपनियों का प्रदर्शन

सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में आईटीसी, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, लार्सन एंड टुब्रो, भारतीय स्टेट बैंक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट आई। इसके विपरीत, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, कोटक महिंद्रा बैंक और एचसीएल टेक के शेयर लाभ में रहे। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि भारतीय बाजार शुरुआती बढ़त को बनाए रखने में असफल रहे।


बाजार की धारणा पर प्रभाव

10 साल के सरकारी बॉण्ड पर प्रतिफल तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी और चीन का शंघाई एसएसई कम्पोजिट गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग मामूली बढ़त में रहा।


अमेरिकी बाजार का प्रभाव

अमेरिकी बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण सितंबर में खुदरा महंगाई दर 5.54 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला के तहत अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।


आर्थिक पूर्वानुमान

एलारा कैपिटल की उप प्रमुख गरिमा कपूर ने कहा कि जिंस कीमतों में दबाव और वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल में वृद्धि के चलते केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। उनका अनुमान है कि रिजर्व बैंक इस वित्त वर्ष में दो बार और ब्याज दरें बढ़ा सकता है।


बाजार में व्यापक गतिविधि

व्यापक बाजार में तेजी देखी गई, बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट सूचकांक 1.65 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मिडकैप सेलेक्ट में 0.66 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का वायदा भाव 1.14 प्रतिशत बढ़कर 105.8 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 3,568.90 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।