चीनी की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि, सरकार की चुनौतियाँ बढ़ीं
चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि
नई दिल्ली। देश में चीनी की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुँच गई हैं। उत्तर प्रदेश की एम-ग्रेड चीनी का एक्स-फैक्ट्री मूल्य मंगलवार को 5,400 रुपये प्रति कुंतल तक पहुँच गया। इस पर 5% जीएसटी (GST) भी लागू होता है। आने वाले दिनों में कीमतों में यह वृद्धि जारी रहने की संभावना है। चीनी की बढ़ती कीमतों ने केंद्र सरकार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। खुदरा बाजार में, जहां एक महीने पहले चीनी 45 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, अब यह 65 रुपये प्रति किलो तक पहुँच गई है। उत्पादन में कमी के बावजूद, चीनी के निर्यात और इथेनॉल उत्पादन के कारण, चालू सीजन के अंत तक चीनी का स्टॉक रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचने का अनुमान है।
महाराष्ट्र में भी कीमतों में वृद्धि
महाराष्ट्र में चीनी के एक्स फैक्ट्री दाम लगभग 5,300 रुपये प्रति कुंतल तक पहुँच गए हैं। जीएसटी जोड़ने के बाद यह मूल्य 5,550-5,600 रुपये प्रति कुंतल तक पहुँच जाता है। दिल्ली में, थोक बाजार में चीनी का मूल्य लगभग 5,800 रुपये प्रति कुंतल हो गया है। इन बढ़ती कीमतों का प्रभाव खुदरा बाजार पर भी जल्द ही दिखाई देगा, जहां कीमतें पहले ही 62-65 रुपये प्रति किलो तक पहुँच चुकी हैं।
सरकारी आंकड़ों में विरोधाभास
केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों में मूल्य 51.68 रुपये हैं।
त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की कीमतों में और वृद्धि सरकार के लिए एक नई चुनौती बन सकती है। हालांकि, सरकारी आंकड़ों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चीनी का औसत दैनिक खुदरा मूल्य अभी भी 51.68 रुपये प्रति किलो है। पिछले दो महीनों में थोक कीमतें 4,400 रुपये प्रति कुंतल से बढ़कर 5,800 रुपये प्रति कुंतल तक पहुँच गई हैं, जो लगभग 32% की वृद्धि है। यदि यह वृद्धि जारी रहती है, तो चीनी के आयात की आवश्यकता भी पड़ सकती है।
सरकार के प्रयास और चुनौतियाँ
सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी के भंडारण की सीमा निर्धारित की है। इसके अलावा, चीनी मिलों के भंडारण का भौतिक सत्यापन भी कराया गया था। लेकिन इन उपायों का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला है।
जमाखोरी को रोकने के लिए, प्रत्येक डीलर के लिए चीनी भंडारण की सीमा 4,000 कुंतल तय की गई है, लेकिन इससे कीमतों में और वृद्धि हो रही है। चीनी व्यापार से जुड़े लोग पहले से ही संभावित आपूर्ति संकट का अनुमान लगा चुके थे।
चीनी मिलों की स्थिति
चीनी मिलों ने आगामी सीजन की पेराई जल्दी शुरू करने की पेशकश की है, लेकिन इसके लिए जीएसटी में छूट जैसी रियायतें मांगी हैं। हालांकि, कई व्यावहारिक समस्याओं के कारण समय पर पेराई शुरू करना आसान नहीं होगा। अनुमान है कि चालू सीजन के अंत में 30-33 लाख टन चीनी का क्लोजिंग स्टॉक रह सकता है, जो कई दशकों में सबसे कम होगा।
केंद्र सरकार ने 24 जुलाई को चीनी मिलों में स्टॉक के भौतिक सत्यापन का आदेश दिया था, लेकिन अभी तक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। यदि सरकार भंडारण के आंकड़े जारी करती है, तो इससे बाजार में अटकलों पर रोक लग सकती है।
