जापान का व्यापार घाटा बढ़ा, निर्यात और आयात में रिकॉर्ड वृद्धि
जापान का व्यापार घाटा और आयात-निर्यात की स्थिति
जापान ने जुलाई में अपने निर्यात और आयात के आंकड़ों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, बढ़ती ऊर्जा की कीमतों और कमजोर येन के कारण देश का व्यापार घाटा लगातार तीसरे महीने बढ़ता जा रहा है, जैसा कि सरकारी आंकड़ों से पता चला है।
वित्त मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में जापान का व्यापार घाटा 634.5 अरब येन (लगभग चार अरब अमेरिकी डॉलर) रहा। यह लगातार तीसरे महीने का घाटा है। मौसमी समायोजित आयात में जुलाई में सालाना आधार पर 27.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 12.15 लाख करोड़ येन (77 अरब डॉलर) तक पहुंच गया।
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। जापान अपनी आवश्यकताओं का अधिकांश तेल आयात करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से पश्चिम एशिया से तेल आयात पर निर्भर है, जहां युद्ध के कारण अवरोध बना हुआ है।
आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में निर्यात 23.2 प्रतिशत बढ़कर 11.51 लाख करोड़ येन (73 अरब अमेरिकी डॉलर) हो गया। अमेरिका और अन्य देशों को वाहनों का निर्यात मजबूत बना रहा, साथ ही सेमीकंडक्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्यात भी बढ़ा।
जापान का निर्यात अब लगभग एक वर्ष से हर महीने बढ़ रहा है। मंत्रालय के अनुसार, जुलाई में आयात और निर्यात दोनों का मूल्य जनवरी 1979 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
जापान ऊर्जा आयात के लिए अमेरिका समेत अन्य वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रहा है। जापान के केंद्रीय बैंक ने मुद्रा को स्थिर करने के लिए हस्तक्षेप किया है, लेकिन इसका स्थायी प्रभाव नहीं पड़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि येन की कमजोरी के पीछे जापान की सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे व्यापक कारण हैं, जिससे इसकी वैश्विक प्रभावशीलता कम हो रही है।
हाल ही में अमेरिकी डॉलर लगभग 158 येन पर कारोबार कर रहा है, जो जुलाई के स्तर से कम है, जब एक डॉलर के लिए 160 येन से अधिक देना पड़ रहा था। हालांकि, यह एक साल पहले के 140 येन के स्तर से अभी भी अधिक है। कमजोर येन जापान की बड़ी निर्यातक कंपनियों, जैसे टोयोटा मोटर कॉर्प, के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इससे विदेशों से होने वाली आय का मूल्य बढ़ जाता है।
टोयोटा और अन्य निर्यातकों ने हाल में मजबूत कमाई दर्ज की है और कमजोर येन से उन्हें लाभ हुआ है। हालांकि, कमजोर येन के कारण विदेशों से कच्चे माल और खाद्य एवं तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं की खरीद महंगी हो जाती है।
