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जापान की अर्थव्यवस्था में वृद्धि, लेकिन निर्यात और खपत में कमी

जापान की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में 1.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, लेकिन निर्यात और निजी खपत में कमी आई है। इस लेख में, हम जानेंगे कि कैसे वैश्विक मांग और ईरान में युद्ध ने जापान की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। इसके अलावा, तेल की बढ़ती कीमतों और भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी।
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जापान की जीडीपी में वृद्धि

जापान की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल से जून 2023 की तिमाही में सालाना आधार पर 1.1 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई। इस दौरान, निजी खपत स्थिर बनी रही और निर्यात की वृद्धि की गति धीमी हो गई। कैबिनेट कार्यालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जापान का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2026 की दूसरी तिमाही में पहली तिमाही की तुलना में मौसमी समायोजन के बाद 0.3 प्रतिशत बढ़ा।


निजी खर्च और निर्यात की स्थिति

जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 2.1 प्रतिशत थी। अप्रैल-जून तिमाही में निजी खर्च में 1.2 प्रतिशत की कमी आई, जबकि निर्यात में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में जापानी वाहनों और सेमीकंडक्टर की वैश्विक मांग ने निर्यात को समर्थन दिया।


वाहन उद्योग और कृत्रिम मेधा का प्रभाव

जापान में टोयोटा मोटर कॉर्पोरेशन और होंडा मोटर कंपनी जैसे प्रमुख वाहन निर्माता हैं। कृत्रिम मेधा (एआई) में बढ़ती रुचि के कारण कंप्यूटर चिप्स की वैश्विक मांग में वृद्धि हुई है, जिससे जापान के निर्यात को भी लाभ मिला। सरकारी खर्च में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।


आर्थिक चुनौतियाँ

हालांकि, तिमाही आधार पर जीडीपी की वृद्धि दर विश्लेषकों की अपेक्षाओं से कम रही। ईरान में चल रहे युद्ध ने जापान की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, जिससे ऊर्जा की लागत में तेजी आई है। संसाधनों की कमी वाले जापान के लिए यह विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वह अपनी अधिकांश तेल आवश्यकताओं का आयात करता है।


तेल की कीमतों में वृद्धि

फारस की खाड़ी से एशिया तक तेल के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध के कारण अवरुद्ध होने से कीमतों में और वृद्धि हुई है। जापान ने अपने तेल भंडार से कुछ हिस्सा निकाला है और वैकल्पिक मार्गों पर काम कर रहा है। वर्तमान में, ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 88 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो एक साल पहले के 65 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से अधिक है।


भविष्य की संभावनाएँ

हालांकि, यह इस साल की शुरुआत में दर्ज किए गए स्तर से कम है, जब कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी।