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जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ: निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

रिलायंस जियो के प्रस्तावित आईपीओ के लिए मूल्य दायरा तय किया गया है, जो निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। कंपनी 27 करोड़ नए शेयर जारी करने की योजना बना रही है, जिससे वह ₹30,213 करोड़ तक जुटा सकती है। बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए शेयर बिक्री 19 अक्टूबर से शुरू होगी, जबकि आम निवेशकों के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है। जियो का आईपीओ न केवल निवेशकों के लिए, बल्कि देश के डिजिटल कारोबार के मूल्यांकन के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ

रिलायंस जियो के शेयर बाजार में प्रवेश की प्रतीक्षा कर रहे निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट आया है। मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने प्रस्तावित आईपीओ के लिए ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर का मूल्य दायरा निर्धारित किया है। यह जानकारी विभिन्न स्रोतों के हवाले से प्राप्त हुई है। यदि यह योजना निर्धारित शर्तों के अनुसार आगे बढ़ती है, तो यह भारत के सबसे बड़े शेयर बाजार निर्गमों में से एक बन सकता है।


आईपीओ से जुटाई जाने वाली राशि

कंपनी इस आईपीओ के माध्यम से 27 करोड़ नए शेयर जारी करने की योजना बना रही है। इस मूल्यांकन के अनुसार, निचले स्तर पर कंपनी लगभग ₹28,755 करोड़ और ऊपरी स्तर पर लगभग ₹30,213 करोड़ जुटा सकती है। हालांकि, आईपीओ का अंतिम आकार और अन्य शर्तें रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में दी गई जानकारी के आधार पर तय की जाएंगी।


शेयर बिक्री की प्रक्रिया

रिपोर्ट के अनुसार, बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए शेयरों की बिक्री 19 अक्टूबर से शुरू हो सकती है, जबकि आम निवेशकों के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है। प्रस्तावित मूल्य के आधार पर, जियो प्लेटफॉर्म्स का बाजार मूल्य शेयर जारी होने के बाद कम से कम ₹10.3 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। यदि कंपनी को इस मूल्य पर बाजार में स्थान मिलता है, तो यह देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल हो सकती है।


आईपीओ में नए शेयरों का निर्गम

कंपनी की योजना के अनुसार, इस आईपीओ में केवल नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें पुराने निवेशकों द्वारा शेयर बेचने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इसका मतलब है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज, मेटा की सहयोगी कंपनी जादू होल्डिंग्स और गूगल इंटरनेशनल इस निर्गम के माध्यम से अपने मौजूदा शेयर नहीं बेचेंगी। आईपीओ से प्राप्त धन का एक बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज चुकाने में उपयोग किया जाएगा, जबकि शेष राशि सामान्य कारोबारी जरूरतों पर खर्च की जाएगी।


रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी

आईपीओ के दस्तावेजों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज की लगभग 66.4% हिस्सेदारी है। वहीं, मेटा की सहयोगी जादू होल्डिंग्स के पास 9.98% और गूगल इंटरनेशनल के पास 7.73% हिस्सेदारी है। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद भी रिलायंस इंडस्ट्रीज कंपनी की मुख्य प्रवर्तक बनी रहेगी।


शेयरधारकों के लिए आरक्षण

इस आईपीओ पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों की भी नजर रहेगी। प्रस्ताव में पात्र शेयरधारकों के लिए कुछ शेयर आरक्षित रखने की संभावना है। हालांकि, इस आरक्षण का सही आकार अंतिम दस्तावेज में ही स्पष्ट होगा। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के नियमों के अनुसार, इस तरह का आरक्षण कुल निर्गम का 10% तक हो सकता है।


जियो का विकास

जियो ने पिछले एक दशक में दूरसंचार, घरेलू इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और तकनीकी क्षेत्र में तेजी से विकास किया है। कंपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं और उद्यम नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय है। वित्त वर्ष 2025-26 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने लगभग ₹1.46 लाख करोड़ का राजस्व और ₹30,049 करोड़ का कुल मुनाफा दर्ज किया है। मार्च 2026 तक कंपनी के ग्राहकों की संख्या 524 मिलियन से अधिक थी। इस प्रकार, इसका आईपीओ न केवल निवेशकों के लिए, बल्कि देश के दूरसंचार और डिजिटल कारोबार के मूल्यांकन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।