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जीएसटी परिषद का कर अधिकारियों की समितियों का पुनर्गठन: नई दिशा में कदम

जीएसटी परिषद ने अपने कर अधिकारियों की समितियों के पुनर्गठन पर विचार करने का निर्णय लिया है। यह कदम अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को अधिक सरल और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रस्तावित ढांचे में सचिवालय, कार्यान्वयन समिति और स्थायी समिति शामिल हैं। यह नई व्यवस्था प्रक्रियाओं को सरल बनाने और व्यापार जगत से मिले ज्ञापनों पर विचार करने में मदद करेगी। जानें इस सुधार के पीछे के सिद्धांत और जीएसटी प्रणाली की स्थिरता के बारे में।
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जीएसटी परिषद का पुनर्गठन प्रस्ताव

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर: माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के नौ साल बाद, जीएसटी परिषद अपने कर अधिकारियों की समितियों के पुनर्गठन पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को अधिक सरल और प्रभावी बनाना है।


समितियों के ढांचे को तीन मुख्य निकायों - सचिवालय, कार्यान्वयन समिति, और अधिकारियों की स्थायी समिति में पुनर्गठित करने का प्रस्ताव है। वर्तमान में, जीएसटी कर अधिकारियों की व्यवस्था में सचिवालय, कार्यान्वयन समिति, फिटमेंट और कानून समिति सहित आठ स्थायी समितियां और 18 क्षेत्रीय समूह शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि नौ साल के बाद जीएसटी प्रणाली अब स्थिर हो चुकी है और पिछले वर्ष कर दरों का ढांचा भी पूरी तरह से तय हो गया था।


इसलिए, आगे का कार्य अधिक सरल और सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकता है। नए ढांचे के अनुसार, जीएसटी कार्यान्वयन समिति (जीआईसी) शीर्ष स्तर पर निर्णय लेने वाली संस्था बनी रहेगी। यह सचिवालय द्वारा भेजे गए मामलों पर विचार करेगी और परिषद द्वारा सौंपे गए विषयों पर निर्णय लेगी।


जीआईसी आवश्यकतानुसार महत्वपूर्ण मामलों को सचिव, केंद्रीय वित्त मंत्री या परिषद के पास भेजेगी। यह तकनीकी शिकायतों का निपटारा भी जारी रखेगी। नई स्थायी समिति तकनीकी कार्यों का प्रबंधन करेगी।


यह प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ-साथ व्यापार और उद्योग से प्राप्त ज्ञापनों पर विचार करने के अलावा कानून, नियमों, अधिसूचनाओं और फॉर्म में संशोधन के प्रस्तावों की जांच करेगी। स्थायी समिति की सदस्यता प्रत्येक राज्य के आकार के अनुसार तय की जाएगी और यह हर दो साल में चक्रीय आधार पर बदलेगी। किसी भी राज्य के पास स्थायी सीट नहीं होगी, और समिति के समक्ष रखे जाने वाले एजेंडे को सभी राज्यों के साथ साझा किया जाएगा ताकि उनकी राय ली जा सके।


सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित संस्थागत सुधार दो सिद्धांतों पर आधारित है - पहला, प्रस्तावों पर शुरू से ही राजनीतिक सहमति और जवाबदेही होनी चाहिए, न कि केवल अधिकारियों के बीच तय करके बाद में उस पर मुहर लगवाई जाए। इसके अलावा, प्रस्तावों के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना इसका दूसरा आधार है। जीएसटी ने उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट जैसे कई स्थानीय करों और उपकरों को मिलाकर एक राष्ट्र, एक कर की एकीकृत व्यवस्था बनाई थी।