जीएसटी परिषद ने अपराधों के लिए सजा के प्रावधानों में बदलाव किया
जीएसटी अपराधों के लिए नई सजा नीति
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर: माल एवं सेवा कर परिषद (जीएसटी) ने जीएसटी से जुड़े अपराधों के लिए अधिकतम पांच साल की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान किया है। अब सजा के प्रावधान को ‘कैद और जुर्माने’ से बदलकर ‘कैद या जुर्माना या दोनों’ किया गया है। इसमें 10 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी के मामलों में अधिकतम सजा के रूप में पांच साल की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है।
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में, जिसमें केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्री शामिल थे, पांच करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 10 करोड़ रुपये से कम की कर चोरी के मामलों में दो साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा को मंजूरी दी गई। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने कहा कि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने पर भी कैद की सजा देना अनिवार्य नहीं होगा। सीबीआईसी ने यह भी बताया कि सजा के प्रावधान को ‘कैद और जुर्माने’ से बदलकर ‘कैद या जुर्माना या दोनों’ करने का प्रस्ताव है, ताकि अदालत को सजा तय करने में विवेकाधिकार मिल सके।
धारा 132 (3) के तहत कम-से-कम छह महीने की कैद की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है, जिससे अदालत को सजा तय करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।
जीएसटी परिषद की सिफारिशें एक अप्रैल, 2027 से लागू होंगी। इसके तहत, जीएसटी कानून के अंतर्गत गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाने का निर्णय लिया गया है, जिससे जीएसटी अधिकारी किसी व्यक्ति को कानून के किसी अपराध के लिए गिरफ्तार नहीं कर सकेंगे।
हालांकि, यदि मामले में शामिल राशि पांच करोड़ रुपये से अधिक है, तो कर अधिकारी की शिकायत पर सक्षम अदालत में अभियोजन की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। परिषद ने जीएसटी चोरी के मामलों में अभियोजन शुरू करने की सीमा को मौजूदा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दिया है।
