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जीएसटी परिषद ने सुधारों की नई दिशा में उठाए कदम

जीएसटी परिषद ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण सुधारों की दिशा में कदम उठाए हैं, जिसमें कर अधिकारियों की गिरफ्तारी का अधिकार समाप्त करना और स्वचालित रिफंड की प्रक्रिया को लागू करना शामिल है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक में सामान्य जुर्माने को घटाने और 'फेसलेस' कर आकलन की योजना की जानकारी दी। ये बदलाव 2027 से प्रभावी होंगे, जिससे करदाताओं को राहत मिलेगी। जानें और क्या-क्या बदलाव किए गए हैं।
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जीएसटी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर: जीएसटी परिषद ने हाल ही में बृहस्पतिवार को कई महत्वपूर्ण सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इनमें कर अधिकारियों की गिरफ्तारी का अधिकार समाप्त करना और अभियोजन की सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करना शामिल है। इसके अलावा, करदाताओं के लिए स्वचालित रिफंड की प्रक्रिया को तेजी से लागू करने का निर्णय लिया गया है।


सामान्य जुर्माने में कमी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि सामान्य जुर्माने को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। ये बदलाव 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी होंगे। परिषद ने यह भी तय किया है कि देर से रिटर्न दाखिल करने या कर भुगतान में देरी करने वाले करदाताओं से केवल बकाया कर, ब्याज और अनुपातिक जुर्माना ही लिया जाएगा।


रिफंड प्रक्रिया में सुधार

इसके अतिरिक्त, सीतारमण ने बताया कि उलट शुल्क ढांचे के तहत रिफंड का लाभ इनपुट सेवाओं तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। यह बदलाव 1 नवंबर, 2026 या उसके बाद लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट पर लागू होगा।


फेसलेस कर आकलन की योजना

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार कई राज्यों में पंजीकृत केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) करदाताओं के लिए 'फेसलेस' कर आकलन की व्यवस्था शुरू करने की योजना बना रही है। उन्होंने बताया कि जीएसटी में गिरफ्तारी की शक्ति समाप्त कर दी जाएगी और 10,000 रुपये से कम की राशि वाले मामलों में कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।


सजा और जुर्माने में बदलाव

सीतारमण ने परिषद द्वारा न्यूनतम सजा को समाप्त करने की सिफारिश की भी जानकारी दी। इसके साथ ही, जुर्माना, कारावास या दोनों में से सजा का निर्धारण न्यायिक विवेक पर छोड़ दिया जाएगा।


जीएसटी में दरों में कोई बदलाव नहीं

उन्होंने स्पष्ट किया कि बैठक में जीएसटी की दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। परिषद की सिफारिशें 1 अप्रैल से लागू होंगी। सीतारमण ने कहा कि जीएसटी परिषद ने मुख्य रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी विसंगतियों को दूर कर लिया है।


भरोसे पर आधारित सुधार

वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी सुधार की प्रक्रिया भरोसे के सिद्धांत पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि कारोबारियों और करदाताओं पर भरोसा करना आवश्यक है। यदि कंपनियां आपस में विश्वास के साथ कार्य करें, तो हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होगी।