जून 2026 में जीएसटी संग्रह में अभूतपूर्व वृद्धि, आर्थिक संकेत सकारात्मक
जून 2026 में जीएसटी संग्रह में 13.9% की वृद्धि हुई, जो पिछले 13 महीनों में सबसे अधिक है। आयात से मिलने वाले टैक्स में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जबकि घरेलू कारोबार में वृद्धि धीमी रही। राज्यों के प्रदर्शन में भी विविधता देखी गई है। जानें इस वृद्धि के पीछे के कारण और इसके आर्थिक प्रभावों के बारे में।
| Jul 1, 2026, 19:26 IST
जीएसटी संग्रह में रिकॉर्ड वृद्धि
देश की कर प्रणाली से जुड़ी एक सकारात्मक खबर आई है। जून 2026 में जीएसटी संग्रह में पिछले 13 महीनों की सबसे बड़ी वृद्धि देखी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस महीने में सकल जीएसटी संग्रह 13.9 प्रतिशत बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले वर्ष जून 2025 में यह आंकड़ा 1.71 लाख करोड़ रुपये था। इससे पहले मई 2026 में जीएसटी संग्रह की वृद्धि दर केवल 3.2 प्रतिशत थी, लेकिन जून में इसमें उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
विशेषज्ञों की राय
जून 2026 की यह वृद्धि मई 2025 के बाद सबसे अधिक मानी जा रही है, जब जीएसटी संग्रह में 16.4 प्रतिशत की वार्षिक बढ़ोतरी हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कर संग्रह सरकार के राजस्व के लिए एक सकारात्मक संकेत है और यह आर्थिक गतिविधियों की स्थिति को भी दर्शाता है।
आयात से जीएसटी संग्रह में वृद्धि
इस बार जीएसटी संग्रह में सबसे बड़ा योगदान आयात से मिलने वाले टैक्स का रहा। आयात पर मिलने वाला जीएसटी 34.6 प्रतिशत बढ़कर 60,038 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 44,600 करोड़ रुपये था। यह स्पष्ट है कि विदेशों से होने वाले आयात पर कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
घरेलू कारोबार का योगदान
दूसरी ओर, घरेलू कारोबार से मिलने वाले सकल जीएसटी संग्रह में अपेक्षाकृत धीमी बढ़ोतरी देखी गई। घरेलू कर संग्रह 6.5 प्रतिशत बढ़कर 1.35 लाख करोड़ रुपये रहा, जो यह दर्शाता है कि जून महीने में कुल कर संग्रह बढ़ाने में आयात का योगदान घरेलू व्यापार की तुलना में अधिक रहा है।
कर वापसी की स्थिति
इस दौरान कर वापसी की राशि भी काफी अधिक रही। जून में कुल 32,436 करोड़ रुपये की कर वापसी की गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29.1 प्रतिशत अधिक है। कर वापसी के बाद सरकार का शुद्ध जीएसटी संग्रह 11.2 प्रतिशत बढ़कर 1.62 लाख करोड़ रुपये रहा।
वित्त वर्ष की पहली तिमाही का प्रदर्शन
यदि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 की बात करें, तो इस दौरान सकल जीएसटी संग्रह 8.4 प्रतिशत बढ़कर 6.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं, शुद्ध संग्रह 7.1 प्रतिशत बढ़कर 5.40 लाख करोड़ रुपये रहा। यह संकेत देता है कि वित्त वर्ष की शुरुआत सकारात्मक रही है, हालांकि सभी क्षेत्रों में समान गति से वृद्धि नहीं हुई है।
राज्यों का प्रदर्शन
राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा। राज्य में जून के दौरान जीएसटी संग्रह 19 प्रतिशत बढ़कर 9,165 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 7,675 करोड़ रुपये था। असम में 17 प्रतिशत, पंजाब में 14 प्रतिशत और गुजरात में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
महाराष्ट्र और अन्य राज्यों का योगदान
देश में सबसे अधिक जीएसटी योगदान देने वाले महाराष्ट्र में भी अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला। वहां संग्रह 9 प्रतिशत बढ़कर 30,714 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कर्नाटक में 10 प्रतिशत और दिल्ली में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
कुछ राज्यों में गिरावट
हालांकि, सभी राज्यों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। राजस्थान और मध्य प्रदेश में जीएसटी संग्रह 5-5 प्रतिशत घट गया। तमिलनाडु में 2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जबकि झारखंड में सबसे अधिक 16 प्रतिशत की कमी आई है।
जीएसटी संग्रह का महत्व
यह ध्यान देने योग्य है कि जीएसटी संग्रह किसी भी देश की आर्थिक गतिविधियों और व्यापारिक स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। मजबूत कर संग्रह से सरकार की आय बढ़ती है, जिससे बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विकास योजनाओं पर खर्च करने की क्षमता भी मजबूत होती है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जीएसटी संग्रह की यह गति लगातार बनी रहती है या नहीं।
