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टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को बताया गैर-कानूनी

भारत के प्रमुख बिजनेस समूह टाटा में एक नया विवाद उभरा है, जब टाटा ट्रस्ट्स ने एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को गैर-कानूनी करार दिया। टाटा संस बोर्ड की बैठक में चार निदेशकों ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया, जबकि नोएल एन. टाटा ने इसका विरोध किया। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके कानूनी पहलुओं के बारे में।
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टाटा ग्रुप में विवाद गहराया

भारत के प्रमुख बिजनेस समूह टाटा में एक महत्वपूर्ण विवाद उभरा है। टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस बोर्ड के उस निर्णय को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में पांच साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था। ट्रस्ट्स ने इसे गैर-कानूनी और अमान्य करार दिया है। यह विवाद टाटा संस बोर्ड की एक महत्वपूर्ण बैठक में सामने आया, जहां निदेशकों ने चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 में समाप्त होने वाले कार्यकाल से पहले पुनर्नियुक्त करने के लिए 4-1 से मतदान किया। एकमात्र असहमत वोट टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा का था, जिन्होंने कहा कि यह कदम कंपनी के 'आर्टिकल्स ऑफ़ एसोसिएशन' का उल्लंघन करता है।


टाटा ट्रस्ट्स ने बताया कि नोएल टाटा ने 17 सितंबर को टाटा संस बोर्ड की बैठक में अपनी बात दोहराई और चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया। ट्रस्ट्स ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "टाटा ट्रस्ट्स का मानना है कि एन. चंद्रशेखरन को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्त करने का प्रस्ताव गैर-कानूनी है।" बयान में यह भी कहा गया कि चार निदेशकों ने पुनर्नियुक्ति के पक्ष में वोट दिया, जबकि नोएल टाटा ने इसके खिलाफ मतदान किया।


बयान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आज की बोर्ड मीटिंग में एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर चार निदेशकों ने समर्थन में और नोएल टाटा ने विरोध में वोट दिया। टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ़ एसोसिएशन' के अनुसार, यह प्रस्ताव कानूनी रूप से अमान्य था। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया में ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टरों के बहुमत का समर्थन आवश्यक है। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि यह नियम पहली नियुक्ति और पुनर्नियुक्ति दोनों पर लागू होता है। ट्रस्ट्स ने कहा, "चूंकि ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टरों में से एक, नोएल टाटा ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया, इसलिए यह कानूनी रूप से अमान्य हो गया।