टाटा समूह के नए चेयरमैन के सामने चुनौतियाँ: एयर इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल कारोबार
टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन
टाटा समूह में नए चेयरमैन के आगमन के साथ, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे उन व्यवसायों को कैसे संभालते हैं, जिनमें भारी निवेश हो रहा है, लेकिन मुनाफा अभी दूर है। एयर इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और टाटा डिजिटल ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं, जिन पर नए नेतृत्व को ध्यान केंद्रित करना होगा।
नए कारोबारों में वित्तीय चुनौतियाँ
हालिया आंकड़ों के अनुसार, इन नए व्यवसायों ने पिछले वित्त वर्ष में लगभग 29,000 करोड़ रुपये का घाटा उठाया है। ये वे क्षेत्र हैं जिन्हें एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा संस में शामिल किया गया या बड़े पैमाने पर विकसित किया गया। इनमें एयर इंडिया का अधिग्रहण, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में प्रवेश, और डिजिटल कारोबार का विस्तार शामिल हैं।
एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति
वर्तमान में, एयर इंडिया टाटा समूह के लिए सबसे बड़ी वित्तीय चुनौती बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया का घाटा बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना है। विमानन क्षेत्र को पुनः मजबूत करने के लिए बेड़े का विस्तार, सेवाओं में सुधार और संचालन में सुधार के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता है। ऐसे में तात्कालिक मुनाफे की उम्मीद कम है।
सरकार की नजरें
सरकार एयर इंडिया और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में टाटा समूह को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रही है। भारत में पहली बार निजी क्षेत्र के माध्यम से सैन्य विमान निर्माण की दिशा में काम हो रहा है। इसके अलावा, ड्रोन और रॉकेट प्रणाली से संबंधित अन्य कार्यक्रमों पर भी काम चल रहा है।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण टाटा समूह की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है। सरकार चाहती है कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बने। टाटा समूह को इस क्षेत्र में कई बड़े आदेश मिले हैं, लेकिन उत्पादन बढ़ाने और संयंत्र स्थापित करने में समय लगेगा।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की प्रगति
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने सकारात्मक संकेत दिए हैं, क्योंकि कंपनी का राजस्व 1.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जिससे यह समूह की चौथी सबसे बड़ी कंपनी बन गई है। हालांकि, मुनाफे की स्थिति अभी भी मजबूत नहीं है।
टाटा डिजिटल की चुनौतियाँ
टाटा डिजिटल की स्थिति अलग तरह की चुनौती पेश करती है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का घाटा बढ़कर 4,974 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 4,610 करोड़ रुपये था। इसी दौरान कंपनी का राजस्व 35,990 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
बिगबास्केट और प्रतिस्पर्धा
टाटा डिजिटल की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक बिगबास्केट है, जिसे 2021 में लगभग 1.5 से 2 अरब डॉलर के मूल्यांकन पर खरीदा गया था। हालांकि, तेजी से सामान पहुंचाने वाले कारोबार में बिगबास्केट देर से उतरा और प्रतिस्पर्धियों ने मजबूत पकड़ बना ली।
न्यूर की स्थिति
टाटा डिजिटल का न्यूर भी समूह की डिजिटल योजनाओं का हिस्सा है, लेकिन यह अभी तक बाजार में अपनी पहचान बनाने में सफल नहीं रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राहकों के लिए न्यूर की उपयोगिता और लाभ अभी तक स्पष्ट नहीं हैं।
भविष्य की चुनौतियाँ
नए टाटा संस चेयरमैन के सामने केवल घाटा कम करने की चुनौती नहीं है, बल्कि यह तय करना भी महत्वपूर्ण होगा कि किन व्यवसायों में दीर्घकालिक निवेश जारी रखना है और किन क्षेत्रों में रणनीति में बदलाव की आवश्यकता है। आने वाले वर्षों में इन व्यवसायों का प्रदर्शन टाटा समूह की विकास कहानी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
