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टोरेंट पावर की 3,000 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज परियोजना पर पर्यावरण संबंधी स्पष्टीकरण

टोरेंट पावर ने महाराष्ट्र के कर्जत में प्रस्तावित 3,000 मेगावाट की पंप्ड स्टोरेज परियोजना के बारे में पर्यावरण संबंधी चिंताओं का स्पष्टीकरण दिया है। कंपनी ने बताया कि यह परियोजना भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से 16 किलोमीटर दूर है और इससे जुड़ी सभी इकाइयाँ अभयारण्य के पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र से बाहर हैं। इसके अलावा, कंपनी ने पेड़ों की कटाई की खबरों को गलत बताया है। जानें इस परियोजना के बारे में और क्या जानकारी है।
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परियोजना का विवरण और पर्यावरणीय चिंताएँ

टोरेंट पावर ने महाराष्ट्र के कर्जत में प्रस्तावित 3,000 मेगावाट की पंप्ड स्टोरेज परियोजना के बारे में पर्यावरण संबंधी चिंताओं का जवाब देते हुए बताया कि यह परियोजना भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना से संबंधित सभी इकाइयाँ अभयारण्य और उसके पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र से बाहर हैं। एक बयान में, कंपनी ने कहा कि यह परियोजना महाराष्ट्र में बिजली की आपूर्ति को बेहतर बनाने में मदद करेगी, खासकर जब सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ रही है। इससे शाम के समय बिजली की अधिक मांग के दौरान कोयले पर निर्भरता भी कम होगी।


पेड़ों की कटाई की खबरों का खंडन

कंपनी ने अभयारण्य के भीतर पेड़ों की कटाई के संबंध में आई खबरों को गलत बताते हुए कहा कि ये जानकारी भ्रामक है। पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं में अतिरिक्त बिजली, जो आमतौर पर सौर और पवन ऊर्जा से प्राप्त होती है, का उपयोग पानी को ऊंचाई पर स्थित जलाशय में पंप करने के लिए किया जाता है। जब बिजली की मांग बढ़ती है, तो इस पानी का उपयोग करके बिजली उत्पन्न की जाती है।


परियोजना की वैधानिक प्रक्रिया

कंपनी ने यह भी बताया कि प्रस्तावित परियोजना भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से 16 किलोमीटर दूर है और इससे जुड़ी सभी इकाइयाँ अभयारण्य की सीमा और पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र से बाहर हैं। इसके अलावा, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर के पास इस परियोजना से संबंधित कोई कार्य प्रस्तावित नहीं है। कंपनी ने कहा कि परियोजना को पर्यावरण मंजूरी, वन मंजूरी और वन भूमि के उपयोग की अनुमति सहित सभी वैधानिक स्वीकृतियाँ प्राप्त करने में लगभग 18 महीने का समय लगा।


परियोजना की अवधि और बिजली उत्पादन

कंपनी ने बताया कि इस परियोजना की अवधि 80 वर्ष होगी और यह सालाना लगभग 6,570 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करेगी। इस मात्रा की बिजली से शाम के समय लगभग 55 लाख घरों की बिजली की जरूरतें पूरी की जा सकेंगी।