डिजिटल भुगतान में री-केवाईसी की समयसीमा पर चिंता बढ़ी
नई दिल्ली में छोटे कारोबारियों की चिंताएं
नई दिल्ली: देश में डिजिटल भुगतान प्रणाली से जुड़े लाखों छोटे व्यवसायियों के लिए री-केवाईसी की समयसीमा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पेमेंट एग्रीगेटर्स ने भारतीय रिजर्व बैंक से 15 सितंबर की अंतिम तिथि को बढ़ाने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि बड़ी संख्या में दुकानदारों का सत्यापन अभी भी बाकी है।
15 सितंबर की डेडलाइन का महत्व
पेमेंट एग्रीगेटर्स का कहना है कि छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और अन्य व्यवसायियों को री-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाई हो रही है। यदि निर्धारित समय सीमा तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तो संबंधित मर्चेंट अकाउंट अस्थायी रूप से बंद किए जा सकते हैं। इससे दुकानदारों को यूपीआई और कार्ड से भुगतान लेने में समस्याएं आ सकती हैं। हालांकि, इसका प्रभाव देश के डिजिटल भुगतान प्रणाली पर व्यापक होने की संभावना नहीं है, क्योंकि इन व्यवसायियों की डिजिटल लेनदेन में हिस्सेदारी सीमित है।
10 लाख छोटे व्यवसायियों पर संभावित प्रभाव
रिपोर्टों के अनुसार, क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान लेने वाले लगभग 30 से 35 प्रतिशत छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले व्यवसाय इस प्रक्रिया से प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा, लगभग 10 लाख छोटे ऑनलाइन व्यवसायों के भुगतान प्रणाली पर भी असर पड़ने की आशंका है। सबसे बड़ी समस्या छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में है, जहां कई दुकानदारों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे व्यवसायियों का सत्यापन करना पेमेंट कंपनियों के लिए चुनौती बन गया है।
री-केवाईसी में चुनौतियाँ
आरबीआई के नियमों के अनुसार, दुकान या व्यवसाय स्थल का भौतिक सत्यापन पेमेंट कंपनी के अपने कर्मचारियों द्वारा किया जाना चाहिए। इसे बाहरी एजेंसी के माध्यम से नहीं किया जा सकता। कंपनियों ने इस कार्य के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई है, लेकिन मर्चेंट्स की संख्या बहुत अधिक होने के कारण मौजूदा स्टाफ पर्याप्त नहीं है। सितंबर 2025 में जारी दिशा-निर्देशों के बाद कंपनियों को लगभग एक साल का समय मिला था, फिर भी बड़ी संख्या में सत्यापन लंबित रह गए हैं।
आरबीआई से समय बढ़ाने की उम्मीद
पेमेंट उद्योग का मानना है कि 15 सितंबर तक लगभग 80 प्रतिशत री-केवाईसी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, जबकि बाकी व्यवसायियों के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता होगी। कंपनियां आरबीआई से व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए समयसीमा बढ़ाने की मांग कर रही हैं। री-केवाईसी का उद्देश्य पहचान, पता और व्यवसाय से संबंधित जानकारी को फिर से सत्यापित करना है, ताकि धोखाधड़ी और गलत लेनदेन को रोका जा सके। वहीं, पेमेंट एग्रीगेटर दुकानदारों को यूपीआई, कार्ड और नेट बैंकिंग जैसे माध्यमों से भुगतान स्वीकार करने की सुविधा प्रदान करते हैं।
