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तांबे की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि: अमेरिका के टैरिफ का प्रभाव

तांबे की कीमतों में हालिया वृद्धि ने बाजार में हलचल मचा दी है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबे की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं, जिसका मुख्य कारण अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाने की आशंका है। इस लेख में जानें कि कैसे वैश्विक आपूर्ति चिंताएं और AI तथा डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मांग ने तांबे की कीमतों को प्रभावित किया है।
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तांबे की कीमतों में उछाल

तांबे की कीमतों में वृद्धि: सोने, चांदी और कच्चे तेल के बाद अब तांबे की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल आया है। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तांबे की कीमतें ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिका द्वारा रिफाइंड तांबे पर टैरिफ लगाने की संभावना है, जिसके चलते व्यापारियों ने तांबे की आपूर्ति अमेरिका की ओर मोड़ दी है, जिससे अन्य बाजारों में इसकी उपलब्धता कम हो गई है।

एलएमई पर तीन महीने के वायदा में तांबे की कीमत 0.8 प्रतिशत बढ़कर 14,533 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो जनवरी में दर्ज किए गए 14,527.50 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से अधिक है। इस वर्ष अब तक तांबे की कीमत में लगभग 17 प्रतिशत और पिछले 12 महीनों में लगभग 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

तांबे की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण आपूर्ति की चिंता है। विश्व की कई प्रमुख तांबा खदानों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। 2026 की पहली छमाही में वैश्विक तांबा खदान उत्पादन में लगभग 1.1 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि तांबा कंसंट्रेट का उत्पादन 2.6 प्रतिशत घटा है।

चिली, इंडोनेशिया और कांगो जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन संबंधी समस्याओं ने बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। नई तांबा खदानों का विकास करने में कई वर्ष लगते हैं, इसलिए अचानक बढ़ी मांग को पूरा करना आसान नहीं है।

AI और डेटा सेंटर से बढ़ी मांग
तांबे की मौजूदा तेजी केवल आपूर्ति की समस्या नहीं है। AI, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन, पावर ग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते निवेश ने तांबे की मांग को मजबूत किया है। AI डेटा सेंटर को बड़ी मात्रा में बिजली और मजबूत इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है। बिजली के तारों, ग्रिड, ट्रांसफार्मर और इलेक्ट्रिकल सिस्टम में तांबे का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।