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तेल की कीमतों में उछाल: अमेरिका-ईरान तनाव का प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो कीमतों में और वृद्धि संभव है। जानें इस स्थिति का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा और विशेषज्ञों की क्या राय है।
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अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हाल ही में एक बार फिर से हलचल देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का कच्चे तेल की कीमतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। हाल की जानकारी के अनुसार, लगातार तीसरे दिन दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी कारण मंगलवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें लगभग एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं।


ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 3.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे पहले, कीमतों में लगभग 9.6 प्रतिशत का उछाल देखा गया था। पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद तेल की कीमतें सामान्य स्तर पर लौट आई थीं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने बाजार की धारणा को फिर से बदल दिया।


अमेरिका की सैन्य कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने लगातार तीसरे दिन ईरान के ठिकानों पर कार्रवाई की है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने दो बड़े तेल टैंकरों को निशाना बनाया और कुवैत तथा बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमला किया।


राष्ट्रपति ट्रंप का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी घोषणा की है कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी फिर से लागू की जाएगी। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की बात भी कही गई है। इन बयानों के बाद निवेशकों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।


विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो तेल की कीमतों में और अधिक वृद्धि देखने को मिल सकती है। सिंगापुर स्थित ऊर्जा बाजार विश्लेषक जून गोह का कहना है कि बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त भंडार तेजी से घट रहा है। ऐसे में यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो कीमतों में अचानक बड़ी बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।


जहाजों की संख्या में कमी

जहाजों की निगरानी करने वाले मंच के आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में पिछले सप्ताह की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। हालांकि, अमेरिका के ऊर्जा विभाग का कहना है कि सैन्य सुरक्षा के बीच तेल की आपूर्ति जारी है और जलमार्ग पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है।


महत्वपूर्ण जलमार्ग

यह ध्यान देने योग्य है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर समुद्री रास्ते से होने वाली तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और ईंधन की कीमतों पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हालात किस दिशा में जाते हैं, उसी के आधार पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की अगली चाल तय होगी।