त्योहारी सीजन में शेयर बाजार की रिकॉर्ड तेजी: क्या है इसके पीछे का राज़?
शेयर बाजार में आई तेजी से निवेशकों में खुशी
त्योहारी मौसम के दौरान शेयर बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है। केवल सात कारोबारी दिनों में, देश के दोनों प्रमुख सूचकांकों ने दो अंकों में वृद्धि दर्ज की है। सेंसेक्स ने 7,782 अंकों की बढ़त हासिल की, जबकि निफ्टी ने 2,331 अंकों की छलांग लगाई। इस प्रदर्शन ने बाजार के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। खास बात यह है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में 1992 में मुहूर्त ट्रेडिंग की शुरुआत के बाद से दिवाली से पहले इतनी बड़ी साप्ताहिक तेजी पहली बार देखी गई है। शुक्रवार को कारोबार समाप्त होने तक सेंसेक्स 81,028 और निफ्टी 25,030 के स्तर पर पहुंच गए।
प्रमुख सूचकांकों की शानदार वृद्धि
सात सत्रों के प्रदर्शन पर गौर करें तो सेंसेक्स में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निफ्टी ने 10.3 प्रतिशत का रिटर्न दिया। इससे पहले, निफ्टी के लिए 1993 में दिवाली से पहले 7.5 प्रतिशत की वृद्धि सबसे अच्छी मानी जाती थी। वर्ष 2020 में भी बाजार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 6.8 प्रतिशत की बढ़त हासिल की थी। लेकिन 2026 की तेजी ने इन दोनों पुराने आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, 2004, 2010, 2018 और 2022 में भी बाजार में दिवाली से पहले सकारात्मक रुख रहा था, लेकिन इस बार की तेजी उनसे कहीं अधिक प्रभावशाली रही।
विदेशी निवेशकों की सक्रियता से बाजार को मिली मजबूती
शेयर बाजार की इस तेजी के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों की सक्रियता भी एक महत्वपूर्ण कारण है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह कारोबारी सत्रों में से पांच दिन विदेशी निवेशकों ने खरीदारी की। इस दौरान उन्होंने भारतीय बाजार में लगभग 18,661 करोड़ रुपये का निवेश किया। विदेशी पूंजी का यह प्रवाह घरेलू शेयरों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इसके साथ ही अमेरिका में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की संभावनाओं ने भी निवेशकों की उम्मीदें बढ़ाई हैं।
कच्चे तेल और अमेरिकी बॉंड यील्ड में गिरावट से मिली राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति विश्वास को मजबूत किया है। ब्रेंट क्रूड के दाम 10 प्रतिशत से अधिक गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल से कम हो गए हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी दस वर्षीय सरकारी बॉंड की यील्ड भी मई में दर्ज लगभग 5.3 प्रतिशत के स्तर से घटकर 4.8 प्रतिशत के आसपास आ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा की कीमतें नीचे रहने से भारत के आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है। इससे रुपये को सहारा मिलने और विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा बढ़ने की संभावना बनती है।
तेजी के बावजूद निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
बाजार की चमक के बीच कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश हो रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पूंजी का बड़ा हिस्सा अन्य बाजारों की ओर जा सकता है। इसके अलावा, अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बाजार में विदेशी निवेश की वापसी फिलहाल सीमित रह सकती है। आने वाले समय में कंपनियों के मुनाफे, ऊर्जा लागत और आर्थिक स्थिरता की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
निफ्टी के लिए 25 हजार का स्तर बना महत्वपूर्ण
तकनीकी विश्लेषकों की नजर अब निफ्टी के अगले पड़ाव पर है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, 24,600 के आसपास तत्काल बाधा देखी जा रही है। इसके ऊपर मजबूती कायम रहने पर सूचकांक 24,800 से 25,000 तक पहुंच सकता है। वहीं, नीचे की ओर 24,300 से 24,400 का दायरा महत्वपूर्ण सहारा माना जा रहा है।
कुछ विशेषज्ञों ने चेताया है कि बाजार में मुनाफावसूली होने पर गिरावट भी देखने को मिल सकती है। इसलिए निवेशकों को केवल तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए।
बड़े शेयरों पर रहेगा निवेशकों का ध्यान
आगे की रणनीति में बड़ी कंपनियों के शेयर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र की चुनिंदा कंपनियों में अभी भी आगे बढ़ने की संभावनाएं मौजूद हैं। हालांकि, बाजार की वास्तविक दिशा आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेश और कंपनियों के वित्तीय नतीजों से तय होगी। फिलहाल, दिवाली से पहले दर्ज हुई यह ऐतिहासिक तेजी भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ी उपलब्धि बन गई है।
