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थोक मुद्रास्फीति में गिरावट: जुलाई में 9.78 प्रतिशत पर पहुंची

जुलाई 2023 में थोक मुद्रास्फीति 9.78 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले नौ महीनों में पहली बार गिरावट दर्शाती है। ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी के चलते यह आंकड़ा सामने आया है। हालांकि, प्राथमिक वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों की महंगाई में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में थोक मुद्रास्फीति में और कमी आ सकती है। जानें इस विषय पर और क्या जानकारी है और भविष्य की संभावनाएं क्या हैं।
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थोक मुद्रास्फीति में कमी का आंकड़ा

ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी के चलते थोक मुद्रास्फीति जुलाई में 9.78 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले नौ महीनों में पहली बार घटने का संकेत है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में सामने आई। जून में यह दर 9.87 प्रतिशत थी।


महंगाई में गिरावट के कारण

यह पहली बार है जब अक्टूबर 2025 के बाद थोक महंगाई में मासिक आधार पर कमी देखी गई है। जुलाई में यह गिरावट मुख्य रूप से ईंधन और बिजली की कीमतों में कमी के कारण आई, जबकि प्राथमिक वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों की महंगाई में वृद्धि हुई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, खनिज तेल, खाद्य वस्तुएं, मूल धातुओं का विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुएं, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण और रसायन एवं रासायनिक उत्पाद जुलाई में थोक महंगाई को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक रहे।


ईंधन और खाद्य वस्तुओं की महंगाई

जुलाई में ईंधन और बिजली की महंगाई घटकर 20.05 प्रतिशत रह गई, जो जून में 27.41 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं की महंगाई भी थोड़ी घटकर 5.44 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 5.49 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई जुलाई में बढ़कर 8.29 प्रतिशत हो गई, जो जून में 7.48 प्रतिशत थी।


उत्पादन उत्पादक मूल्य सूचकांक

आंकड़ों के अनुसार, उत्पादन उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) में जुलाई में सालाना आधार पर 9.6 प्रतिशत की महंगाई रही, जो जून के समान स्तर पर है। सरकार ने बताया कि पीपीआई लगभग पांच वर्षों में डब्ल्यूपीआई की जगह ले लेगा। उत्पादन पीपीआई में विनिर्माण और खनन क्षेत्र की महंगाई कम हुई, लेकिन कृषि और बिजली क्षेत्र में महंगाई बढ़ने से इसका प्रभाव निष्प्रभावी हो गया।


भविष्य की संभावनाएं

बार्कलेज की एक शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि थोक मुद्रास्फीति की दिशा में बदलाव आया है और आने वाले महीनों में इसमें कमी आने की संभावना है, क्योंकि वैश्विक कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं। बार्कलेज ने कहा, "हम मानते हैं कि थोक मुद्रास्फीति अपने चरम पर पहुंच चुकी है और इसके बाद धीरे-धीरे और मामूली गिरावट जारी रहनी चाहिए।"


भारत का कच्चा तेल आयात

भारत अपने कच्चे तेल के आयात का एक बड़ा हिस्सा इस मार्ग से करता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुख्य अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि जुलाई में थोक महंगाई में कमी व्यापक नहीं थी और यह पूरी तरह से ईंधन एवं बिजली समूह के कारण आई। जून की तुलना में अन्य सभी समूहों में महंगाई बढ़ी है।


आगामी महीनों की महंगाई

अग्रवाल ने कहा कि अगस्त में थोक मुद्रास्फीति में अधिक कमी आने और इसके 9.5 प्रतिशत से नीचे रहने की उम्मीद है। मई-जून 2026 में यह 9.9 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष के अधिकांश समय में मुद्रास्फीति ऊंची बनी रहने की संभावना है और वित्त वर्ष 2026-27 में औसत डब्ल्यूपीआई महंगाई लगभग 8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।


खुदरा महंगाई के आंकड़े

थोक महंगाई के आंकड़े इस सप्ताह की शुरुआत में जारी खुदरा महंगाई के आंकड़ों से अलग तस्वीर पेश करते हैं। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई, जो जून में 4.38 प्रतिशत थी। इसमें खाद्य कीमतों में वृद्धि की प्रमुख भूमिका रही।


आरबीआई की मौद्रिक नीति

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने इस महीने की शुरुआत में नीतिगत दरों को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा था। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई पांच प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।