दवा उद्योग के लिए जीएसटी में महत्वपूर्ण बदलाव: आईटीसी का लाभ
दवा कंपनियों को मिलेगा आईटीसी का लाभ
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर: दवा कंपनियों को वित्त वर्ष 2027-28 से मुफ्त नमूनों और समाप्त अवधि वाले सामान पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) प्राप्त करने की अनुमति दी जाएगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद ने दवा क्षेत्र के लिए आईटीसी को सरल बनाने और कर रिफंड प्रक्रिया में सुधार के लिए प्रस्तावों को मंजूरी दी। इन परिवर्तनों से उद्योग के उत्पादन, नकदी प्रवाह और निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ये जीएसटी कानून में संशोधन वित्त वर्ष 2027-28 से लागू होंगे। दवा उद्योग में डॉक्टरों को मुफ्त नमूने देना, समाप्त भंडार का प्रबंधन करना और नियामकीय आवश्यकताओं के तहत सामान का निपटान करना सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, नष्ट किए गए सामान पर आईटीसी का लाभ केवल उन्हीं मामलों में मिलेगा, जहां कानून के अनुसार सामान का नष्ट होना आवश्यक है।
ईवाई इंडिया में साझेदार आशीष जैन ने कहा कि ये प्रस्ताव दवा फॉर्मूलेशन, टीकों, जैविक उत्पादों, जांच संबंधी उत्पादों और उपभोक्ता स्वास्थ्य उत्पादों का निर्माण करने वाली कंपनियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होंगे। इन क्षेत्रों में उत्पादों के नमूने देना और समाप्त भंडार का प्रबंधन करना सामान्य है। डेलॉयट इंडिया के महेश जयसिंह ने कहा कि परिषद के निर्णय से भारतीय दवा उद्योग को जीएसटी के क्षेत्र में दोहरा लाभ मिला है।
समाप्त अवधि के बाद दवाओं को नष्ट करने या बट्टे खाते में डालने पर आईटीसी की सुविधा से भंडार पर कर का बोझ कम होगा। रिफंड की गणना में इनपुट सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं को शामिल करने से उद्योग की प्रमुख चुनौतियों में से एक का समाधान होगा। ईवाई इंडिया के सुरेश नायर ने कहा कि इनपुट सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं पर जमा आईटीसी के रिफंड का प्रस्ताव विनिर्माण इकाइयों और निर्यात केंद्रित गतिविधियों में निवेश करने वाली कंपनियों की कार्यशील पूंजी के बेहतर उपयोग में मदद कर सकता है।
