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दिल्ली उच्च न्यायालय ने डाबर इंडिया के खाद्य उत्पादों पर प्रतिबंध पर लगाई रोक

दिल्ली उच्च न्यायालय ने डाबर इंडिया के खाद्य उत्पादों पर एफएसएसएआई द्वारा लगाए गए प्रतिबंध पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि कंपनी को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया था, जिससे यह निर्णय लिया गया। इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। जानें इस महत्वपूर्ण मामले के सभी पहलुओं के बारे में।
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दिल्ली उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय

नई दिल्ली, 7 अगस्त: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को खाद्य नियामक एफएसएसएआई द्वारा डाबर इंडिया को शहद, गाय के घी और खाद्य तेल जैसे उत्पादों को 100 प्रतिशत दावों के साथ बेचने से रोकने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि डाबर लंबे समय से इन उत्पादों की बिक्री कर रहा है और प्रथम दृष्टया उसे राहत देने का मामला बनता है, क्योंकि एफएसएसएआई ने आदेश जारी करने से पहले कंपनी को सुनवाई का अवसर नहीं दिया था।


न्यायमूर्ति महाजन ने कहा, “न्यायालय का प्रथम दृष्टया यह मानना है कि बिना सुनवाई का अवसर दिए प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया जाना चाहिए था।”


इसके साथ ही, उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है। डाबर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क किया कि एफएसएसएआई का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए बिना कारण बताओ नोटिस और सुनवाई के पारित किया गया है। वहीं, केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने खाद्य नियामक के आदेश का समर्थन करते हुए कहा कि कंपनी को पहले ‘सुधार नोटिस’ और परामर्श जारी किए गए थे और उसके उत्पादों पर 100 प्रतिशत का दावा भ्रामक है।


एफएसएसएआई ने सोमवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि उसने डाबर इंडिया लिमिटेड को ऐसे खाद्य उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है, जिन पर 100 प्रतिशत जैसे भ्रामक दावे किए गए हैं। इनमें शहद, सेब का सिरका, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे उत्पाद शामिल हैं।