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दिल्ली उच्च न्यायालय ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक को बंद करने का आदेश दिया

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक को बंद करने का आदेश दिया है, जिसके पीछे भारतीय रिजर्व बैंक का निर्णय है। आरबीआई ने बैंक के नियामकीय मानकों के उल्लंघन के कारण इसका लाइसेंस रद्द किया था। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके प्रभावों के बारे में।
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आरबीआई का निर्णय और उच्च न्यायालय का आदेश

मुंबई, 28 जुलाई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को जानकारी दी कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) को बंद करने का आदेश जारी किया है। आरबीआई ने अप्रैल 2026 में बैंक के नियामकीय मानकों का उल्लंघन करने के कारण इसका बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया था। केंद्रीय बैंक ने पीपीबीएल के संचालन को जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ पाया था।


इसके बाद, आरबीआई ने उच्च न्यायालय में बैंक को बंद करने के लिए याचिका दायर की थी। केंद्रीय बैंक ने कहा, 'दिल्ली उच्च न्यायालय ने आठ जुलाई और 22 जुलाई के आदेशों के तहत बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 और कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए पीपीबीएल को बंद करने का निर्देश दिया है।'


इसके साथ ही, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक गिरिकुमार एम नायर को पेटीएम पेमेंट्स बैंक का आधिकारिक परिसमापक नियुक्त किया गया है। आरबीआई ने न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि परिसमापक आठ जुलाई, 2026 से बैंक के निदेशक मंडल को प्राप्त सभी शक्तियों का उपयोग करेंगे।


पेटीएम की सहयोगी कंपनी पीपीबीएल पर पहले भी कई बार नियामकीय कार्रवाई की गई है। 2022 में नए ग्राहकों को जोड़ने पर रोक लगा दी गई थी, और इसके बाद 2024 में इसकी जमा और अन्य सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।