दिल्ली में व्यापार के लिए अनुकूलता का संकट: वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट
दिल्ली की व्यापारिक स्थिति पर चिंता
दिल्ली, जो देश की राजधानी है, से लोगों की अपेक्षाएँ बहुत अधिक हैं। हालाँकि, टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार की हालिया समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि वर्ल्ड बैंक के 'बिज़नेस रेडी' (B-Ready) असेसमेंट में राजधानी का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है। यह एक विरोधाभास उत्पन्न करता है, क्योंकि दिल्ली को भारत के एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन यहाँ व्यापार करने के लिए आवश्यक सुविधाओं और माहौल की कमी है। इसमें प्रॉपर्टी रिकॉर्ड, रजिस्ट्रेशन, निर्माण की मंजूरी और पानी की गुणवत्ता की बुनियादी निगरानी जैसी सेवाएँ शामिल हैं।
डिजिटल सेवाओं का प्रभाव
हालांकि कई सरकारी सेवाएँ ऑनलाइन हो चुकी हैं, लेकिन डिजिटल परिवर्तन का प्रभाव नागरिकों और व्यवसायों को सेवाएँ तेजी से उपलब्ध कराने में पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हुआ है.
B-READY असेसमेंट की जानकारी
वर्ल्ड बैंक का 'बिज़नेस रेडी' (B-READY) असेसमेंट यह निर्धारित करता है कि किसी देश का व्यापारिक माहौल प्राइवेट सेक्टर में गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कितना अनुकूल है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि क्या व्यवसायों को सरकारी सेवाएँ आसानी से मिलती हैं और ये सेवाएँ कितनी प्रभावी हैं। इस मूल्यांकन में तीन मुख्य मानदंडों का उपयोग किया जाता है: नियम, सार्वजनिक सेवाएँ, और उनकी उपलब्धता की दक्षता। हाल ही में जारी 2025 के संस्करण में 101 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया था, और प्रत्येक मानदंड को 0 से 100 के बीच स्कोर दिया गया। इसमें व्यवसाय शुरू करना, निर्माण परमिट प्राप्त करना, उपयोगिता सेवाएँ, करों का भुगतान, वित्त प्राप्त करना, सीमा पार व्यापार करना और विवादों का समाधान करना शामिल हैं।
दिल्ली सरकार का प्रदर्शन
चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने पाया कि वर्ल्ड बैंक के मूल्यांकन में दिल्ली का स्कोर शून्य से आंशिक स्तर तक है। रिपोर्ट के अनुसार, 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यहाँ का बिखरा हुआ भूमि रिकॉर्ड सिस्टम है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भूमि के मालिकाना हक, म्यूटेशन, रजिस्ट्रेशन और प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़ी जानकारी कई विभागों में बंटी हुई है। इस कारण प्रॉपर्टी से संबंधित सभी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर प्राप्त करना कठिन हो गया है। समीक्षा में यह भी सामने आया कि DDA, MCD और NDMC के पास कई पुराने भूमि और लीज़ रिकॉर्ड अभी भी डिजिटाइज़ नहीं हुए हैं। इसके अलावा, शहर की प्रॉपर्टीज़ के लिए कोई यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर नहीं है, जिससे डिजिटाइज़ेशन की प्रक्रिया और भी जटिल हो जाती है।
