दिवाला पेशेवरों के लिए आचार संहिता का महत्व: दीप्ति गौर मुखर्जी का संदेश
आचार संहिता की आवश्यकता पर जोर
नई दिल्ली, 13 जून - कॉरपोरेट मामलों की सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी ने शनिवार को दिवाला पेशेवरों के लिए आचार संहिता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नैतिक आधार के बिना उनकी वित्तीय समझ का कोई मूल्य नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था की असली पूंजी विश्वास है और दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत निर्धारित आचार संहिता से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।
मुखर्जी ने राष्ट्रीय राजधानी में स्नातकोत्तर दिवाला कार्यक्रम (पीजीआईपी) के छठे बैच के दीक्षांत समारोह और दिवाला सुधारों के एक दशक पर आयोजित सम्मेलन में अपने विचार साझा किए। यह कार्यक्रम भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) द्वारा संचालित किया जाता है।
उन्होंने कहा, “यदि नैतिक आधार नहीं है, तो आपकी वित्तीय विशेषज्ञता, बौद्धिक क्षमता और रणनीतिक सोच बेकार हो जाती है।” उन्होंने आईबीसी कानून की मूल भावना को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इस क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को तथ्यों या आंकड़ों को गलत तरीके से पेश नहीं करना चाहिए।
आईबीसी कानून संकट में फंसी कंपनियों और संपत्तियों के समय पर निपटारे के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करता है, जिसे कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है। इस प्रणाली में दिवाला पेशेवर एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।
