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देहरादून में दून बासमती की खेती का पुनरुद्धार: 160 किसानों ने शुरू की रोपाई

देहरादून में दून बासमती चावल के पुनरुद्धार के प्रयासों ने 160 किसानों को एक नई शुरुआत दी है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग के समन्वित प्रयासों से 75 हेक्टेयर में इसकी रोपाई शुरू की गई है। इस पहल का उद्देश्य न केवल दून बासमती की खेती को बढ़ावा देना है, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार और आय के अवसर भी प्रदान करना है। जानें इस परियोजना के तहत किसानों को मिलने वाले लाभ और भविष्य की योजनाएं।
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दून बासमती का पुनर्जीवन

देहरादून, 28 जुलाई: अपनी अनोखी सुगंध और बेहतरीन स्वाद के लिए मशहूर दून बासमती चावल के पुनरुद्धार के प्रयास रंग ला रहे हैं। पिछले साल के सफल परीक्षण के बाद, इस बार जिले में 75 हेक्टेयर में लगभग 160 किसानों ने इसकी रोपाई शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, दून बासमती के संरक्षण और संवर्धन के लिए जिला प्रशासन, कृषि विभाग और ग्रामोत्थान परियोजना के समन्वित प्रयासों से न केवल इसकी खेती को पुनर्जीवित किया जा रहा है, बल्कि किसानों को बाजार उपलब्ध कराने, गुणवत्तापूर्ण बीज के संरक्षण, परीक्षण और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है।


जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि दून बासमती को पुनर्जीवित करने के लिए 2025 में प्रारंभिक परीक्षण के दौरान लगभग 65 हेक्टेयर में इसकी खेती की गई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।


उन्होंने आगे बताया कि इस वर्ष दून बासमती की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाकर 75 हेक्टेयर किया गया है और जिले के 160 किसानों ने इसकी रोपाई शुरू की है। चौहान ने कहा कि सहसपुर और विकासनगर विकासखंड के अलावा रायपुर और डोईवाला विकासखंड के किसान भी दून बासमती की खेती में रुचि दिखा रहे हैं।


आने वाले समय में, दून बासमती को उसकी विशेष सुगंध, गुणवत्ता और स्थानीय पहचान के साथ एक मजबूत ब्रांड के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और अधिक आय का अवसर मिल सके।


किसानों की आय में सुधार

जिले के मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि 2025 में लगभग 65 हेक्टेयर में करीब 100 किसानों ने इसकी खेती की थी और अब इस पारंपरिक फसल की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना (रीप) के माध्यम से किसानों से उनकी उपज की सीधी खरीद की गई।


पिछले वर्ष, जिला प्रशासन की पहल पर 200 क्विंटल से अधिक दून बासमती धान 65 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया, जिसके परिणामस्वरूप किसानों के खातों में 13 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा की गई।


सीडीओ ने कहा कि दून बासमती की खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता है। रीप और हिलान्स (उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों का एक ब्रांड) के माध्यम से दून बासमती के विपणन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।


बीज बैंक और परीक्षण सुविधाएं

उन्होंने बताया कि दून बासमती के संरक्षण और किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए विकासनगर में जल्द ही बीज बैंक स्थापित किया जाएगा, जिससे भविष्य में किसानों को बेहतर गुणवत्ता और अच्छी उपज देने वाला दून बासमती का बीज आसानी से मिल सकेगा।


जिलाधिकारी ने कहा कि विकासनगर में दून बासमती की उचित परीक्षण सुविधा विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दून बासमती की विशेष सुगंध, गुणवत्ता और स्थानीय पहचान को ब्रांड के रूप में विकसित कर किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देहरादून की पारंपरिक कृषि विरासत को संरक्षित करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।


मुख्य कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि एक समय दून बासमती की खेती लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र में होती थी, लेकिन धीरे-धीरे इसका क्षेत्र घटता गया।


किसानों की उम्मीदें

हरबर्टपुर के किसान सूर्य प्रकाश बहुगुणा ने बताया कि उनके क्षेत्र के लगभग 25 से 30 किसान दून बासमती के पुनर्जीवन अभियान से जुड़े हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में इसकी खेती का क्षेत्र और बढ़ेगा और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य भी मिलेगा।