Newzfatafatlogo

नारायण पुजारी: मुंबई के रेस्टोरेंट साम्राज्य के निर्माता

नारायण पुजारी की कहानी एक प्रेरणादायक यात्रा है, जो कर्नाटक के कुंडापुर से मुंबई तक फैली है। 13 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे पुजारी ने एक कैंटीन में सफाई का काम किया और धीरे-धीरे रेस्टोरेंट व्यवसाय में कदम रखा। शिव सागर रेस्टोरेंट की स्थापना से लेकर अब तक, उन्होंने अपने अनुभव और मेहनत से एक सफल साम्राज्य खड़ा किया है। जानें कैसे उन्होंने अपने व्यवसाय को बढ़ाया और महामारी के बाद भी सफलता हासिल की।
 | 

कुंडापुर से मुंबई तक का सफर


कर्नाटक के कुंडापुर से महज 13 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे नारायण पुजारी ने कभी नहीं सोचा था कि वह करोड़ों रुपये के रेस्टोरेंट व्यवसाय के मालिक बनेंगे। उनकी यात्रा एक कैंटीन से शुरू हुई, जहां वह ग्राहकों के खाने के बाद सफाई करते थे। इस दौरान, उन्होंने नाइट स्कूल में पढ़ाई भी जारी रखी। लगभग एक दशक तक, उन्होंने खाद्य उद्योग के विभिन्न पहलुओं को सीखा और रेस्टोरेंट चलाने की बारीकियों को समझा, जो उनकी सफलता की नींव बनी।


शिव सागर का सफर

1990 में, कारोबारी बघुभाई पटेल ने मुंबई के केम्प्स कॉर्नर में शिव सागर रेस्टोरेंट की स्थापना की और नारायण पुजारी को मैनेजर नियुक्त किया। कुछ महीनों में, यह नौकरी साझेदारी में बदल गई। पटेल के साथ काम करते हुए, पुजारी ने व्यवसाय को गहराई से समझा। 1991 में पटेल के निधन के बाद, पुजारी ने रेस्टोरेंट की जिम्मेदारी संभाली और इसे आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया।


मेन्यू में विविधता

शुरुआत में, शिव सागर का मेन्यू सीमित था, जिसमें केवल आइसक्रीम शामिल थी। धीरे-धीरे, पिज्जा, पाव भाजी, दक्षिण भारतीय व्यंजन, चाइनीज और उत्तर भारतीय पकवान भी जोड़े गए। इस विविधता ने विभिन्न ग्राहकों को आकर्षित किया। उस समय, पिज्जा एक नया विकल्प था, जिसने रेस्टोरेंट की लोकप्रियता को बढ़ाने में मदद की।


रेस्टोरेंट का संचालन

ग्राहकों की मांग को देखते हुए, शिव सागर पहले रात ढाई बजे तक खुला रहता था। हालांकि, 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के बाद, संचालन के समय में बदलाव करना पड़ा। जैसे-जैसे व्यवसाय बढ़ा, पुजारी ने नए आउटलेट भी खोले, जिसमें चर्चगेट, कोलाबा और ठाणे शामिल हैं। अब, इसकी सबसे बड़ी शाखा नासिक हाईवे पर है, जिसमें लगभग 300 लोगों के बैठने की व्यवस्था है।


राजस्व में वृद्धि

ट्रैक्सन के आंकड़ों के अनुसार, शिव सागर का राजस्व वित्त वर्ष 2015 में 10.65 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2020 में बढ़कर 34.55 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, कोरोना महामारी ने व्यवसाय को प्रभावित किया, जिससे वित्त वर्ष 2021 में राजस्व गिरकर 10.82 करोड़ रुपये रह गया।


महामारी के बाद की रिकवरी

वित्त वर्ष 2022 में, राजस्व 34.83 करोड़ रुपये और मुनाफा 1.62 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद, वित्त वर्ष 2023 में राजस्व 72.29 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2024 में 93.76 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2025 में 111.45 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस अवधि में मुनाफा भी 7.47 करोड़ रुपये हो गया।


एक नाम, कई रेस्टोरेंट

मुंबई और अन्य हिस्सों में शिव सागर और सुख सागर नाम से कई रेस्टोरेंट हैं, लेकिन ये सभी एक ही कारोबारी समूह का हिस्सा नहीं हैं। मुंबई के विले पार्ले में शंकर पुजारी ने 1981 में अलग शिव सागर की स्थापना की थी। नारायण पुजारी की यात्रा 1990 में केम्प्स कॉर्नर से शुरू हुई, जो अब 15 आउटलेट्स तक पहुंच गई है।