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निफ्टी इंडिया FPI 150 इंडेक्स में वायदा कारोबार की अनुमति से विदेशी निवेशकों को मिलेगा लाभ

भारत के बाजार नियामक सेबी ने निफ्टी इंडिया FPI 150 इंडेक्स में वायदा कारोबार को मंजूरी दी है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना और भी सरल हो जाएगा। इस इंडेक्स में शामिल कंपनियों का चयन उनकी लिक्विडिटी और विदेशी निवेशकों के बीच उनकी प्रतिष्ठा के आधार पर किया गया है। नए डेरिवेटिव्स की अनुमति से निवेशकों को जोखिम कम करने और नए निवेश विकल्पों का लाभ मिलेगा। जानें इस इंडेक्स की संरचना, शेयर चयन प्रक्रिया और बाजार पर इसके संभावित प्रभाव के बारे में।
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मुंबई में सेबी की नई पहल


मुंबई: भारत के बाजार नियामक सेबी ने 'निफ्टी इंडिया FPI 150 इंडेक्स' में फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग को मंजूरी दे दी है। यह इंडेक्स विशेष रूप से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए बनाया गया है। इस निर्णय से वैश्विक निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना और भी सरल हो जाएगा।


निफ्टी इंडिया FPI 150 इंडेक्स का उद्देश्य

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने इस इंडेक्स को इस उद्देश्य से शुरू किया था कि विदेशी निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखने का एक पारदर्शी माध्यम मिले, जो विदेशी निवेश के लिए उपयुक्त हैं। सेबी की मंजूरी के बाद, इस इंडेक्स से जुड़े डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग संभव होगी, जिससे निवेशकों को जोखिम कम करने और नए निवेश विकल्पों का लाभ मिलेगा।


निफ्टी इंडिया FPI 150 इंडेक्स की संरचना

क्या है निफ्टी इंडिया FPI 150 इंडेक्स?


यह इंडेक्स 'निफ्टी 500' में से 150 कंपनियों के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करता है। इन कंपनियों का चयन उनकी लिक्विडिटी, विदेशी निवेश के लिए उपलब्ध शेयरों की संख्या और विदेशी निवेशकों के बीच उनकी प्रतिष्ठा के आधार पर किया गया है। जिन कंपनियों पर विदेशी निवेश पर प्रतिबंध है, उन्हें इस इंडेक्स में शामिल नहीं किया गया है। यह इंडेक्स इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि विदेशी निवेशकों के लिए 'इंडेक्स फंड्स' और 'ईटीएफ' जैसे नए वित्तीय उत्पादों को आसानी से लॉन्च किया जा सके।


शेयर चयन प्रक्रिया

कैसे चुने जाते हैं शेयर?


इस इंडेक्स में शेयरों का चयन पिछले छह महीनों के दौरान उनकी औसत 'फॉरेन इन्वेस्टिबल फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन' के आधार पर किया जाता है। हर तिमाही इस इंडेक्स की समीक्षा की जाती है, और मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर में आवश्यक बदलाव किए जाते हैं।


बाजार पर प्रभाव

बाजार पर क्या होगा असर?


F&O ट्रेडिंग की शुरुआत से भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है। इस इंडेक्स में शामिल कंपनियों को पैसिव इन्वेस्टमेंट के जरिए लाभ मिल सकता है, जबकि समीक्षा के दौरान जो कंपनियां बाहर होंगी, उनके शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। यदि बड़े ईटीएफ प्रदाता इस इंडेक्स को मानक के रूप में अपनाते हैं, तो भारत में विदेशी फंड का प्रवाह बढ़ सकता है।


सेक्टर की हिस्सेदारी

किस सेक्टर की कितनी हिस्सेदारी है?


इस इंडेक्स में सबसे अधिक हिस्सेदारी फाइनेंशियल सर्विसेज की है, जो 26.15% है। इसके बाद अन्य प्रमुख सेक्टर्स हैं:



  • ऑयल, गैस और कंज्यूमेबल फ्यूल्स: 10.03%

  • हेल्थकेयर: 7.51%

  • इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT): 7.39%

  • ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स: 7.27%

  • कैपिटल गुड्स: 5.55%


इंडेक्स की प्रमुख कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, इंफोसिस, लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक शामिल हैं।


प्रदर्शन का विश्लेषण

कैसा रहा है प्रदर्शन?


निफ्टी इंडिया FPI 150 इंडेक्स को 16 अगस्त 2025 को लॉन्च किया गया था, जिसका बेस ईयर अक्टूबर 2022 और बेस वैल्यू 1,000 निर्धारित की गई थी। 30 जून के आंकड़ों के अनुसार, इस इंडेक्स ने वर्ष 2026 में अब तक -5.22% का रिटर्न दिया है, जबकि एक साल का रिटर्न -2.81% रहा है। हालांकि, इसकी शुरुआत से अब तक इसने कुल 12.15% की वृद्धि दर्ज की है। नए डेरिवेटिव्स को मिली मंजूरी से वैश्विक निवेशकों के बीच भारत का आकर्षण बढ़ेगा और भारत केंद्रित नए निवेश साधनों के विकास को मजबूती मिलेगी।