निवेश सलाह देने वाले प्रभावकों की बढ़ती संख्या पर चिंता: नई रिपोर्ट
निवेश सलाह में बढ़ती अनियमितता
आजकल, कई लोग निवेश से संबंधित जानकारी के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। वीडियो और छोटे संदेशों के माध्यम से शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश विकल्पों पर सलाह दी जा रही है। हाल ही में एक नई रिपोर्ट ने इस बढ़ते चलन पर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश वित्तीय प्रभावक सेबी में पंजीकृत नहीं हैं, फिर भी वे निवेश संबंधी सलाह देते रहते हैं।
सीएफए संस्थान की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
सीएफए संस्थान द्वारा जारी रिपोर्ट में जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच भारत में सक्रिय 48 वित्तीय प्रभावकों का विश्लेषण किया गया। इसमें से केवल तीन प्रभावक सेबी में पंजीकृत पाए गए, जो कुल का 6.3 प्रतिशत हैं। इसके अलावा, 16 प्रभावकों ने सीधे शेयर खरीदने, बेचने या बनाए रखने की सलाह दी, जिनमें से केवल दो पंजीकृत थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे मामलों की नियामक स्तर पर जांच की आवश्यकता हो सकती है।
पारदर्शिता की कमी
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले अध्ययन की तुलना में स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। पहले केवल 2 प्रतिशत प्रभावक सेबी में पंजीकृत थे, जो अब बढ़कर 6.3 प्रतिशत हो गए हैं। हालांकि, निवेश संबंधी स्पष्ट सलाह देने वालों का अनुपात लगभग 33 प्रतिशत बना हुआ है, जो नियमों और वास्तविकता के बीच के अंतर को दर्शाता है।
महत्वपूर्ण जानकारी का अभाव
अध्ययन के अनुसार, केवल 62.5 प्रतिशत प्रभावकों ने प्रायोजित सामग्री या संभावित हितों के टकराव की जानकारी साझा की। 37.5 प्रतिशत ने इस तरह का कोई खुलासा नहीं किया। इसके अलावा, लगभग 72.9 प्रतिशत प्रभावकों ने निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे शुल्क और कर संबंधी प्रभाव की जानकारी दी, लेकिन एक चौथाई से अधिक ने इन बातों का उल्लेख नहीं किया।
सीएफए संस्थान के सुझाव
सीएफए संस्थान ने निवेशकों की सुरक्षा के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें निवेश संबंधी खुलासे के लिए समान नियम लागू करने, वित्तीय प्रभावकों के लिए अलग आचार संहिता बनाने, और सेबी तथा सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के बीच बेहतर सहयोग बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, बिना पंजीकरण के सलाह देने वाले खातों की पहुंच और कमाई सीमित करने की आवश्यकता भी बताई गई है।
