पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान संघर्ष से ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए हमलों ने ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इस लेख में हम इन घटनाओं के पीछे के कारणों और उनके संभावित प्रभावों पर चर्चा करेंगे, जिसमें बांड बाजार की स्थिति और ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे बड़े सौदों का भी उल्लेख किया गया है।
| Sep 2, 2026, 20:24 IST
ऊर्जा बाजार में चिंता का माहौल
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुए सीधे हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के कारण क्षेत्रीय तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे यह आशंका बढ़ गई है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह न केवल तेल की आपूर्ति को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर दबाव डाल सकता है।
सीधे हमलों का नया दौर
हालिया जानकारी के अनुसार, मंगलवार को अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने बाद सीधे हमलों का नया दौर शुरू हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति ने लारक द्वीप पर हमले के बाद आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही पहले से ही कठिन हो चुकी है। इसी बीच, सऊदी अरब की तेल कंपनी ने फारस की खाड़ी से तेल प्रवाह बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन ईरानी ड्रोन हमलों ने इस प्रयास को बाधित कर दिया।
सऊदी टैंकरों पर हमले
मंगलवार को सऊदी तेल लेकर जा रहे दो बड़े टैंकरों पर होर्मुज से निकलते समय प्रक्षेप्य से हमला हुआ। यह घटना तब हुई जब अरामको ने अगस्त में खाड़ी से तेल लदान बढ़ाकर लगभग सात लाख बैरल प्रतिदिन कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट तेल की कीमत लगभग 92 डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि पश्चिम एशिया के कुछ प्रमुख तेल मानक 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गए।
बांड बाजार में बढ़ती चिंताएं
तेल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ वैश्विक बांड बाजार में भी चिंता बढ़ रही है। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में दीर्घकालिक बांड पर ब्याज दरें 2008 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नए प्रमुख द्वारा महंगाई पर कड़ा रुख अपनाने के संकेत के बाद, दस वर्षीय अमेरिकी सरकारी बांड की दर 4.76 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
महंगे कर्ज का प्रभाव
महंगे कर्ज का अर्थव्यवस्था में मांग को कमजोर करने का खतरा है। इसका असर वाहन खरीद, हवाई यात्रा, निर्माण, कारखानों और माल ढुलाई पर पड़ सकता है। इसके अलावा, तेल निकालने, पाइपलाइन बनाने और नई परियोजनाओं की लागत भी बढ़ती है। इस महीने अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना लगभग 60 प्रतिशत मानी जा रही है।
ऊर्जा क्षेत्र में बड़े सौदे
इस बीच, ऊर्जा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सौदे भी हुए हैं। वनओक ने ब्राजोस मिडस्ट्रीम की प्राकृतिक गैस परिसंपत्तियां 4.4 अरब डॉलर में खरीदी हैं। शेल और शेवरॉन ने घाना के साउथ डीपवाटर टानो तेल क्षेत्र में प्रवेश के लिए प्रारंभिक समझौता किया है।
चीन में सौर ऊर्जा की वृद्धि
चीन में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता पहली बार कोयले से आगे निकल गई है। वहीं, जस्ता की कीमत चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है और चिली में खराब मौसम के कारण तांबे का उत्पादन 2011 के बाद जुलाई में सबसे निचले स्तर पर रहा है। यह स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया का संघर्ष अब केवल तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा, धातु, व्यापार और वैश्विक मांग पर भी प्रभाव डालने वाला है।
