पश्चिम एशिया में तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका
पश्चिम एशिया में बढ़ते वैश्विक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सिलसिला अगले सप्ताह भी जारी रहने की संभावना है। इससे आपूर्ति में रुकावट की चिंताएं बनी हुई हैं। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा लिए जाने वाले मौद्रिक नीति संबंधी निर्णय का बाजार की दिशा पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।
विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का मानना है कि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के साथ, निवेशकों की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी घटनाओं, ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों और अमेरिका के साप्ताहिक भंडार आंकड़ों पर रहेगी। अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन अपने साप्ताहिक भंडार के आंकड़े जारी करेंगे।
भंडार और बैठक का महत्व
कुशिंग में कच्चे तेल का भंडार और 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण होगी। रेलिगेयर ब्रोकिंग में वरिष्ठ उपाध्यक्ष-शोध अजित मिश्रा ने कहा कि निकट भविष्य में कीमतों का रुख तेजी का है, लेकिन यह काफी हद तक समाचारों से प्रभावित होगा। कारोबारियों को कीमतों में तेज उछाल के पीछे भागने से बचना चाहिए और आगे की दिशा की पुष्टि के लिए वैश्विक घटनाक्रम, फेडरल रिजर्व के संकेतों और साप्ताहिक भंडार आंकड़ों पर ध्यान देना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार पर प्रभाव
उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा बुनियादी ढांचे या होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं, यदि तनाव कम करने की दिशा में ठोस प्रगति होती है, तो कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड में जिंस शोध प्रमुख नवनीत दमानी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य और सऊदी अरब के आसपास हमलों में वृद्धि से बाजार का ध्यान ऊर्जा बुनियादी ढांचे और निर्यात की सुरक्षा पर केंद्रित हो गया है।
चुनावों के बाद की स्थिति
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे, जिसमें नतांज के पास स्थित परमाणु प्रतिष्ठान भी शामिल हैं, को निशाना बनाने की योजना तैयार करने की खबरों ने चिंता को बढ़ा दिया है।
