पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर, उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद कम
पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी
रविवार को देशभर में पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें घोषित की गई हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने एक बार फिर ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। ऐसे में वाहन चालकों को पुराने रेट पर ही पेट्रोल और डीजल खरीदना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरने के बावजूद घरेलू स्तर पर कोई राहत नहीं मिली है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, लेकिन अब यह लगभग 72 से 75 डॉलर प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। तेल कंपनियां अभी भी पुराने महंगे कच्चे तेल की लागत का हवाला दे रही हैं।
बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमतें
देश के कई प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें 110 रुपये प्रति लीटर से अधिक बनी हुई हैं। हैदराबाद में पेट्रोल 115.69 रुपये, तिरुअनंतपुरम में 115.49 रुपये, कोलकाता में 113.51 रुपये, पटना में 113.37 रुपये, जयपुर में 112.69 रुपये, बेंगलुरु में 111.68 रुपये और मुंबई में 111.21 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इन ऊंची कीमतों ने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाला है।
दिल्ली, लखनऊ और नोएडा में कीमतें
दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। लखनऊ में पेट्रोल 101.86 रुपये और डीजल 95.36 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। नोएडा में पेट्रोल 101.96 रुपये और डीजल 99.44 रुपये प्रति लीटर है। गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये तथा डीजल 95.64 रुपये प्रति लीटर, जबकि चंडीगढ़ में पेट्रोल 101.54 रुपये और डीजल 89.47 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
राहत की संभावना कम
पेट्रोलियम मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि तेल विपणन कंपनियां अभी भी अधिक कीमत पर खरीदे गए कच्चे तेल को रिफाइन कर रही हैं। इस कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल कटौती की संभावना कम है। उल्लेखनीय है कि मई में तेल कंपनियों ने चार बार कीमतें बढ़ाई थीं, जिसके बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर महंगे हो गए थे।
कच्चे तेल की कीमतों पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में घरेलू ईंधन कीमतों का निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल और तेल कंपनियों की लागत पर निर्भर करेगा। फिलहाल उपभोक्ताओं को पुराने रेट पर ही पेट्रोल और डीजल खरीदना होगा। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है और लागत का दबाव कम होता है, तभी राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
