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पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क में महत्वपूर्ण परिवर्तन

केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को समाप्त कर दिया गया है, जबकि डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर शुल्क बढ़ा दिया गया है। यह निर्णय घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। नई दरें 31 अक्टूबर 2026 से लागू हो गई हैं। जानें इस बदलाव के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभाव।
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केंद्र सरकार का नया निर्णय


केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर लगाया गया विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) समाप्त कर दिया गया है, जो पहले 2.5 रुपये प्रति लीटर था।


डीजल निर्यात पर शुल्क में वृद्धि

पेट्रोल पर शुल्क समाप्त करने के साथ ही, सरकार ने डीजल के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया है। हाई-स्पीड डीजल पर SAED को 8.5 रुपये से बढ़ाकर 11.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जिससे इसमें 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है।


एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर भी बढ़ा शुल्क

एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर भी शुल्क में वृद्धि की गई है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना संख्या 56/2026-Central Excise के अनुसार, ATF पर शुल्क 10.5 रुपये से बढ़ाकर 11 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस प्रकार, सरकार ने पेट्रोल पर शुल्क को समाप्त कर दिया है, जबकि डीजल और विमान ईंधन पर इसे बढ़ाया है।


नई दरें कब से लागू हुईं?

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने इन परिवर्तनों के लिए अधिसूचनाएं जारी की हैं। नई दरें 31 अक्टूबर 2026 से लागू हो गई हैं, जब ये आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित हुईं। इससे पहले, 16 अक्टूबर को सरकार ने पेट्रोल पर 2.5 रुपये, डीजल पर 8.5 रुपये और ATF पर 10.5 रुपये प्रति लीटर निर्यात शुल्क निर्धारित किया था।


निर्यात शुल्क लगाने का कारण

केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता के चलते पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर विशेष शुल्क लगाया था। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना था।


शुल्क की नियमित समीक्षा

सरकार हर 15 दिन में पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्यात शुल्क की समीक्षा करती है। इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन की औसत कीमतों को ध्यान में रखा जाता है। 31 अक्टूबर को किया गया ताजा बदलाव भी इसी समीक्षा का हिस्सा है।