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प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक सुरक्षा पर दी चेतावनी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में भारत की आर्थिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कुछ देशों द्वारा संसाधनों और समुद्री मार्गों का नियंत्रण भारत के लिए खतरा बन रहा है। मोदी ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों के दोहन की योजनाओं का उल्लेख किया। जानें उनके विचार और पिछले 12 वर्षों में सरकार की उपलब्धियों के बारे में।
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भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बयान में कहा कि कुछ देशों द्वारा संसाधनों और रणनीतिक समुद्री मार्गों का नियंत्रण भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा है। उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि विदेशी आपूर्तियों पर निर्भरता कम की जा सके। मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को ऊर्जा और खनिजों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव बाहरी स्रोतों पर निर्भरता के खतरों को उजागर कर रहे हैं।


भू-राजनीतिक दबाव और संसाधनों का उपयोग

किसी विशेष देश का नाम लिए बिना, मोदी ने कहा कि ईंधन, दवाओं और प्रौद्योगिकी जैसे संसाधनों का उपयोग तेजी से भू-राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि रणनीतिक भौगोलिक मार्गों का भी नियंत्रण किया जा रहा है। यह टिप्पणी ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल संघर्ष और तेहरान की प्रतिक्रिया के संदर्भ में आई है, जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।


ऊर्जा में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता

मोदी ने कहा कि भू-राजनीतिक संघर्षों ने ऊर्जा में आत्मनिर्भरता के महत्व को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने भारत के अप्रयुक्त अपतटीय भंडारों के बड़े पैमाने पर दोहन की योजना का उल्लेख किया, जिसमें हाल ही में स्वीकृत 84,084 करोड़ रुपये की समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना शामिल है। इसका उद्देश्य अगले पांच वर्षों में गहरे पानी और अत्यधिक गहरे पानी के क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज को तेज करना है।


घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों का दोहन

इस पहल का लक्ष्य घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना और वैश्विक ऊर्जा मूल्य व आपूर्ति में होने वाले झटकों से भारत के जोखिम को कम करना है। प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जिसमें पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) का दायरा 70 शहरों से बढ़कर 700 शहरों तक पहुंचना शामिल है। अब 2014 में 22 लाख घरों की तुलना में 1.75 करोड़ घरों में इस ईंधन की आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा, सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन एक दशक पहले के दो गीगावाट से बढ़कर 160 गीगावाट हो गया है।