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प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना: सौर ऊर्जा में नया अध्याय

सरकार ने 5,070 करोड़ रुपये के बजट के साथ प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है, जो जलाशयों पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विकास को प्रोत्साहित करेगी। इस योजना के तहत 5,000 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सौर परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी, जिससे देश की सौर ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके साथ ही, यह योजना रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद करेगी। जानें इस योजना के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
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सरकार की नई पहल

शुक्रवार को, सरकार ने 5,070 करोड़ रुपये के बजट के साथ ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना’ (पीएम-एसएसवाई) को मंजूरी दी। इस योजना के अंतर्गत जलाशयों पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं को ऊर्जा भंडारण प्रणाली के साथ विकसित किया जाएगा। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को स्वीकृति मिली।


परियोजनाओं की क्षमता

इस योजना के तहत 5,000 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सौर परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी, जिनमें कम से कम दो घंटे की ऊर्जा भंडारण क्षमता होगी, यानी 10,000 मेगावाट-घंटा। इन परियोजनाओं को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच स्वीकृत किया जाएगा, और वित्तीय सहायता का वितरण 2032-33 तक जारी रहेगा। योजना के अंतर्गत सफल क्रियान्वयन के बाद प्रति मेगावाट एक करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी।


सहायता और लाभ

इसके अतिरिक्त, व्यवहार्यता अध्ययन और अन्य प्रारंभिक गतिविधियों के लिए प्रति परियोजना 50 लाख रुपये तक की सहायता भी उपलब्ध होगी। यह योजना सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को लाभान्वित करेगी, जिससे देश की फ्लोटिंग सौर क्षमता 700 मेगावाट से बढ़कर 5,000 मेगावाट हो जाएगी।


परियोजनाओं के लाभ

सरकार ने बताया कि इन परियोजनाओं से जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का बेहतर उपयोग होगा, और भूमि की कमी की समस्या का समाधान होगा। ऊर्जा भंडारण प्रणाली के एकीकरण से बिजली ग्रिड की विश्वसनीयता में सुधार होगा। इस योजना से हर साल लगभग एक करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है, और परियोजनाओं की श्रृंखला में लगभग 16,000 से 17,000 रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे।


आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

यह योजना घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूत करेगी। यह नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने, राष्ट्रीय ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने, और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी सहायक होगी। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि इस योजना से लगभग 28,500 करोड़ रुपये का कुल निवेश आने की संभावना है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में परिवर्तन को गति देगा।


फ्लोटिंग सौर ऊर्जा की क्षमता

जोशी ने कहा कि यह योजना देश के जलाशयों और अन्य जल निकायों में मौजूद फ्लोटिंग सौर ऊर्जा की लगभग 102 गीगावाट क्षमता का उपयोग करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता मार्च 2014 में 2.82 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 में 150.26 गीगावाट हो जाएगी, जबकि फ्लोटिंग सोलर की मौजूदा क्षमता लगभग 700 मेगावाट है। उद्योग निकाय एनएसईएफआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुब्रमण्यम पुलिपाका ने कहा कि यह योजना न केवल नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाएगी, बल्कि सीमित भूमि संसाधनों पर दबाव कम करेगी और देशभर में स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाने में भी मदद करेगी।