प्रवर्तन निदेशालय ने बैंक धोखाधड़ी मामले में 3.66 करोड़ रुपये की बीमा पॉलिसियां जब्त कीं
प्रवर्तन निदेशालय ने एक बड़े बैंक धोखाधड़ी और धन शोधन मामले में 3.66 करोड़ रुपये की दो जीवन बीमा पॉलिसियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई है और मामला एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। जांच में पता चला है कि कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भारतीय स्टेट बैंक को भारी नुकसान पहुंचाया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और प्रवर्तन निदेशालय की आगे की कार्रवाई के बारे में।
| Jun 28, 2026, 20:29 IST
बैंक धोखाधड़ी और धन शोधन की कार्रवाई
आर्थिक अपराधों के खिलाफ कार्रवाई की गति लगातार बढ़ रही है। इसी संदर्भ में, प्रवर्तन निदेशालय के भोपाल कार्यालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लगभग 3.66 करोड़ रुपये की दो निवेश आधारित जीवन बीमा पॉलिसियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत की गई है।
यह मामला एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड और इसके प्रवर्तक श्रीकांत भासी से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय इस मामले की जांच काफी समय से कर रहा है। एजेंसी के अनुसार, जब्त की गई जीवन बीमा पॉलिसियों का कुल समर्पण मूल्य लगभग 3.66 करोड़ रुपये है।
इस मामले की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी से हुई थी। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों ने कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय स्टेट बैंक को लगभग 1266.63 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। यह नुकसान कथित तौर पर फर्जी व्यापारिक लेनदेन के माध्यम से हुआ था।
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह सामने आया कि कंपनी और उसके प्रवर्तकों ने फर्जी व्यापारिक दस्तावेज तैयार किए और गोल-गोल वित्तीय लेनदेन किए। इसके अलावा, बैंक से प्राप्त धन को विभिन्न कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। एजेंसी का कहना है कि इस धन का उपयोग विभिन्न संपत्तियों में निवेश के लिए किया गया था।
जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि श्रीकांत भासी के नाम पर विदेशी कंपनी के माध्यम से दो जीवन बीमा पॉलिसियां संचालित की जा रही थीं। इन पॉलिसियों में निवेश उस समय किया गया था, जब कथित अपराध से जुड़े वित्तीय लेनदेन हो रहे थे। जांच एजेंसी का दावा है कि इन पॉलिसियों में जमा धन विदेशी खातों और श्रीकांत भासी से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से पहुंचाया गया था।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, अप्रैल 2026 में श्रीकांत भासी ने इन पॉलिसियों को समाप्त कर उनकी राशि भारत में अपने बैंक खाते में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था। एजेंसी को आशंका थी कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं की गई तो कथित अपराध से अर्जित धन को अन्यत्र भेजा जा सकता है। इसी कारण धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 5(1) के तहत दोनों पॉलिसियों को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है।
यह पहली कार्रवाई नहीं है; प्रवर्तन निदेशालय ने दुबई में लगभग 51.70 करोड़ रुपये मूल्य की नौ अचल संपत्तियां भी जब्त की हैं। इसके अलावा, भारत में भी लगभग 111 करोड़ रुपये मूल्य की कई संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है।
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि धन शोधन के मामलों में जांच एजेंसियां केवल नकदी ही नहीं, बल्कि बीमा पॉलिसियों, अचल संपत्तियों और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों की भी जांच करती हैं। यदि यह पाया जाता है कि इन परिसंपत्तियों का संबंध कथित अपराध से अर्जित धन से है, तो उन्हें कानून के तहत जब्त या कुर्क किया जा सकता है।
फिलहाल, प्रवर्तन निदेशालय की जांच जारी है। एजेंसी का कहना है कि कथित अपराध से अर्जित संपत्तियों का पूरा पता लगाने और उन्हें जब्त करने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। मामले की जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
