बिहार का मखाना: अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती पहचान और निर्यात लक्ष्य
बिहार के मखाने का वैश्विक विस्तार
पटना, 9 अक्टूबर: बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को जानकारी दी कि राज्य का मखाना अब 20 से अधिक देशों के बाजारों में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2030-31 तक मखाना के निर्यात को 30,000 टन तक बढ़ाना है। कृषि विभाग के अनुसार, राज्य सरकार कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष पहचान दिलाने का प्रयास कर रही है।
मखाना से समृद्धि अभियान
सिन्हा ने बताया कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 'मखाना से समृद्धि अभियान' शुरू किया है। इस योजना के तहत मखाना की खेती के क्षेत्र को दोगुना करने, उत्पादन में वृद्धि करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिहार की हिस्सेदारी को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि बिहार देश के कुल मखाना उत्पादन का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा रखता है।
निर्यात में वृद्धि
मंत्री के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने 20 से अधिक देशों को 7,200 टन से अधिक मखाना और उससे बने उत्पादों का निर्यात किया, जिससे 2.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आय हुई। अमेरिका, पश्चिम एशिया और अफ्रीका जैसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय मखाना की मांग में वृद्धि हो रही है।
जीआई टैग का महत्व
उन्होंने बताया कि इस वर्ष जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग प्राप्त मिथिला मखाना की खेप अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ग्रीस में भेजी गई है। पहली बार बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) के बिहटा औद्योगिक क्षेत्र से जीआई टैग वाले मिथिला मखाना की 18 टन की खेप समुद्री मार्ग से ऑस्ट्रेलिया भेजी गई। सिन्हा ने कहा कि मखाना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, जीआई टैग के माध्यम से उसकी पहचान को मजबूत करने और किसानों की बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने से उनकी आय में वृद्धि के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं
मंत्री के अनुसार, इस अभियान के तहत मखाना की खेती का क्षेत्र वित्तीय वर्ष 2025-26 के 41,000 हेक्टेयर से बढ़ाकर 2030-31 तक 82,000 हेक्टेयर करने का लक्ष्य है।
