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बिहार में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री का नया लक्ष्य

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाओं की घोषणा की है। उनका लक्ष्य प्रतिदिन एक करोड़ लीटर दूध का उत्पादन करना है। इसके लिए पशुपालकों को आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। साथ ही, बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए एक महासंघ का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सुधा ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की भी योजना बनाई है। जानें इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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मुख्यमंत्री का दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य

पटना, 27 जुलाई: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को घोषणा की कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रतिदिन एक करोड़ लीटर दूध का उत्पादन करना है। उन्होंने बताया कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पशुपालकों को आधुनिक तकनीक, उन्नत प्रशिक्षण, बेहतर नस्ल के पशु, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत डेयरी अवसंरचना प्रदान की जा रही है।


मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि सम्राट चौधरी ने नालंदा के बिहारशरीफ डेयरी परियोजना परिसर में 20 टन क्षमता वाले दही और लस्सी संयंत्र, बिहार राज्य दुग्ध सहकारी महासंघ लिमिटेड (कॉम्फेड) द्वारा संचालित हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के पेट्रोल पंप और सुधा कैफेटेरिया का शिलान्यास किया।


पशुपालकों के लिए नई सुविधाएं

इस अवसर पर, मुख्यमंत्री ने 300 खुदरा विक्रेताओं को डीप फ्रीजर वितरित किए और पशु बचाव एवं परिवहन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही, उन्होंने पशुपालकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन भी किया और बिहारशरीफ स्थित सुधा डेयरी संयंत्र का निरीक्षण किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 टन प्रतिदिन क्षमता वाले दही और लस्सी संयंत्र की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।


बकरी पालन को बढ़ावा

उन्होंने बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए एक अलग महासंघ के गठन की योजना का भी उल्लेख किया। इस महासंघ के माध्यम से बकरी के दूध के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे बकरी पालन से जुड़े लाखों ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं की आय में वृद्धि होगी।


सम्राट चौधरी ने कहा कि नालंदा को बिहार का प्रमुख दुग्ध उत्पादन और डेयरी प्रसंस्करण केंद्र बनाने का लक्ष्य है।


आधुनिक डेयरी उद्योग का विकास

आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों, शीत श्रृंखला, विपणन नेटवर्क और नई परियोजनाओं के माध्यम से इसे डेयरी उद्योग के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार पशुओं के स्वास्थ्य की चिंता कर रही है और दुर्घटनाओं में घायल पशुओं को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराने के लिए पशु बचाव एवं परिवहन वाहनों का उपयोग किया जाएगा।


मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य के प्रत्येक प्रखंड में प्रधानमंत्री पशु जन औषधि केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि पशुपालकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण पशु औषधियां मिल सकें।


सुधा ब्रांड को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल बिहार में दूध और दुग्ध उत्पादों की मांग को पूरा करना नहीं है, बल्कि सुधा ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना भी है।


गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक, मूल्य संवर्धन और निर्यात क्षमता को बढ़ाकर बिहार के दुग्ध उत्पादों को वैश्विक बाजार में पहुंचाने की योजना है। उन्होंने बताया कि भारत के कुल दुग्ध उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है।


नए आउटलेट और श्वेत क्रांति

राज्य में 2,500 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है और सुधा के 200 नए आउटलेट खोले जाने हैं, जिनमें से 88 के लिए स्थान का चयन हो चुका है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आज शुरू की गई परियोजनाएं राज्य में श्वेत क्रांति को नई गति देंगी, लाखों पशुपालकों की आय बढ़ाएंगी और विकसित तथा समृद्ध बिहार के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।